कश्मीर में बर्फबारी बन रही आतंकियों के लिए काल, बर्फीले छोड़ रिहायशी इलाकों में पहुंच रहे आतंकी

कश्मीर में होने वाली बर्फबारी आतंकियों के काल की वजह बन रही है। वह रिहायशी इलाकों में आकर छुपने की कोशिश कर रहे हैं, जहां उनके सामने खुफिया एजेंसियों के सटीक इनपुट मौत बनकर खड़े हैं। इनपुट इतने सटीक हैं कि सिर्फ उसी घर को सुरक्षाबल घेर रहे हैं, यहां आतंकी पनाह लिए होते हैं।

जानकारी के अनुसार, कश्मीर के बारामुला, कुपवाड़ा, टंगधार, उड़ी, शोपियां आदि के ऊपरी इलाकों में बर्फ गिरना शुरू हो गई है। आतंकियों के हाइड आउट बर्फ से प्रभावित हो रहे हैं। वह इससे बचने के लिए रिहायशी इलाकों में पहुंच रहे हैं, जो उनकी मौत का कारण बन रहे हैं। दरअसल, कश्मीर में खुफिया एजेंसियों का ग्रिड बहुत मजबूत हो गया है।

जम्मू कश्मीर पुलिस की मदद से खुफिया एजेंसियों को आतंकियों के छिपे होने के सटीक इनपुट मिले रहे हैं। इसलिए सेना की तरफ से सिर्फ उसी घर को घेरकर कार्रवाई की जा रही है, यहां पर आतंकी छुप रहे हैं। सुरक्षाबल रात को ही उस घर को घेर कर सुबह तड़के कार्रवाई कर रहे हैं, ताकि आतंकियों के समर्थन में स्थानीय लोग भी आगे न आएं। इसके बाद आपरेशन शुरू होने पर उस जगह को उड़ाया जा रहा है, जहां यह आतंकी छुपे हुए होते हैं।

बिन आकाओं के अकेले पड़ रहे आतंकी

बिन आकाओं के अकेले पड़ रहे आतंकी
पिछले दो साल में कश्मीर में कई बड़े आतंकी कमांडर मारे जा चुके हैं। ऐसे में कश्मीर में सक्रिय आतंकी बिना आकाओं के ही लड़ रहे हैं। आतंकियों के लड़ने की प्लानिंग कमजोर पड़ रही है। जबकि सुरक्षा एजेंसियों के मजबूत घेरे से आतंकी बाहर निकलने को मजबूर हो रहे हैं। जो उनकी मौत का कारण बन रहे हैं। बुरहान वानी, सज्जाद पाडर, सब्जार भट्ट, जीनत उल इस्लाम जैसे आतंकी मारे जा चुके हैं। जो आतंकियों को लीड करते थे।आतंकियों की सोच बदलने की जरूरत
जम्मू कश्मीर पुलिस के पूर्व डीजीपी एम एम खजुरिया का कहना है कि इसमें कोई दो राय नहीं कि यह बड़ी कामयाबी है। लेकिन आतंकियों की सोच बदलनी भी जरूरी है। बेशक तीन दिन में 13 आतंकी मारे गए, लेकिन इतने और पैदा हो जाएं, तो उससे कोई फायदा नहीं है। इसलिए आतंकियों से जरूरी है कि आतंकवाद को खत्म किया जाए।