श्रीनगर में कम होने लगा कुत्तों का आतंक, नगर निगम ने नसबंदी को बनाया हथियार

ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए सिरदर्द बने आवारा कुत्तों पर अंकुश लगने लगा है। पिछले एक वर्ष से चल रही मुहिम के तहत डॉग बाइट के मामलों में गिरावट आई है। इस साल नवंबर तक डॉग बाइट के कुल 4300 मामले रिपोर्ट हुए हैं। जबकि बीते दो वर्षों की तुलना में यह आंकड़ा करीब एक हजार कम है। श्रीनगर नगर निगम अब इन मामलों को और कम करने की व्यवस्थाओं में जुट गया है।श्रीनगर में आवारा कुत्तों का आतंक लोगों के लिए बड़ा सिरदर्द रहा है। हर साल डॉग बाइट के पांच हजार से ज्यादा मामले रिपोर्ट होते हैं। वर्ष 2016 में 5100 जबकि वर्ष 2018 में यह मामले बढ़कर 5216 हो गए।

डॉग बाइट के बढ़ते मामलों को देखते हुए श्रीनगर नगर निगम ने शेरे कश्मीर यूनिवर्सिटी आफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी(कश्मीर) के साथ डॉग बर्थ कंट्रोल पर एमओयू किया है। कुत्तों की नसबंदी कर इनकी संख्या को नियंत्रित किया जा रहा है।

एसएमसी के कमिश्नर खुर्शीद सनाई ने बताया कि एक तरफ बर्थ कंट्रोल के उपाय किए जा रहे हैं तो दूसरी तरफ खुले में कचरे को ठिकाने लगाया जा रहा है। प्रयास किया जा रहा है कि घर-घर से कचरा उठाकर कवर्ड डंपर में डालकर उसका निस्तारण किया जाए। खुले में गारबेज शेड बंद किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि होटलों समेत अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी कचरा निस्तारण पर जागरूक किया जा रहा है।

नगर निगम के डॉग स्टरलाइजेशन सेंटर में अब तक तीन हजार से ज्यादा कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। निगम अब 1.4 करोड़ की लागत से एक और प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है जिसमें कुत्तों को रखने की क्षमता को 120 तक पहुंचाया जाएगा। एसएमसी के कमिश्नर ने बताया कि अगले दो वर्षों में 75 फीसदी कुत्तों की नसबंदी का लक्ष्य रखा गया है।