लॉकडाउन के दौरान जम्मू-कश्मीर में बढ़ीं आतंकी घटनाएं, घुसपैठ की फिराक में 300 आतंकवादी

जम्मू-कश्मीर में लॉकडाउन शुरू होने के बाद से आतंकवादी घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। शनिवार को आंतकवादियों के साथ मुठभेड़ में उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में एक मेजर समेत पांच सैनिक शहीद हो गए थे। वहीं, दो आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया। 
देश में 25 मार्च से लॉकडाउन शुरू हुआ था जिसके बाद से जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं और गतिविधियों में तेजी आई है। सेना को जितना नुकसान लॉकडाउन से पहले पूरे साल में हुआ था उससे कहीं ज्यादा लॉकडाउन 1.0 लागू होने के बाद से अब तक हो चुका है।
गर्मियों में बढ़ जाती हैं आतंकवादी गतिविधियांआतंक से संबंधित घटनाओं में वृद्धि की एक वजह गर्मी की शुरुआत भी हो सकती है। क्योंकि गर्मियों की शुरुआत होते ही नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास से बर्फ पिघलनी शुरू हो जाती है जिसकी वजह से कश्मीर क्षेत्र में उग्रवादी गतिविधि बढ़ जाती हैं। सर्दियों के दौरान भारत में घुसपैठ करने के अधिकांश मार्ग बंद रहते हैं।

संघर्ष विराम उल्लंघन भी मुख्य कारण
हमलों में हालिया वृद्धि के लिए लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के एक नए आतंकवादी संगठन द रेसिस्टेंट फ्रंट (टीआरएफ) की रिपोर्ट भी बताई जा रही है। आतंकी घटनाओं में वृद्धि का एक स्पष्ट संकेतक संघर्ष विराम उल्लंघन भी है जिसमें इस साल पिछले कुछ वर्षों की तुलना में 50 फीसदी से अधिक की वृद्धि देखी गई है।

घुसपैठ की फिराक में 300 आतंकवादी
बर्फ पिघलना शुरू होने के साथ ही कश्मीर में आतंकवादियों की गतिविधियों में तेजी आ सकती है क्योंकि जानकारी मिली है कि लगभग 300 आतंकवादी एलओसी पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से भारत में घुसपैठ करने की फिराक में हैं। 

सेना के एक कमांडर के अनुसार, इस बात की संभावना हो सकती है कि इनमें से कुछ आतंकवादी कोरोना वायरस से संक्रमित हैं ऐसे में सैनिकों को उग्रवादियों के साथ मुछभेड़ और उनके शवों को उठाने के दौरान अत्यधिक सावधानी से आगे बढ़ने के निर्देश दिए गए हैं।

वहीं आज सुप्रीम कोर्ट में जम्मू-कश्मीर में पिछले साल धारा 370 के निरस्त होने के बाद 4जी इंटरनेट सेवाओं की बहाली के बारे में सुनवाई होगी।