जम्मू-कश्मीर: हैंड ग्रेनेड फेंकने के लिए ठेका, निशाना सही लगा तो 500 रुपये पक्के

जम्मू-कश्मीर में 1980-90 के दौरान आतंकवादियों ने हैंड ग्रेनेड फेंकने के लिए ठेका प्रणाली शुरू की थी। वही दौर आज फिर लौट आया है। सुरक्षा एजेंसियों ने यह बात पूरे तथ्यों के आधार पर मानी है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी समूह जम्मू-कश्मीर के युवाओं और नाबालिगों को गुमराह कर उनसे ठेका प्रणाली के आधार पर हैंड ग्रेनेड फेंकने का काम करा रहे हैं।

अस्सी के दशक में बेरोजगार युवाओं को भारतीय सुरक्षा बलों पर हैंड ग्रेनेड फेंकने के 50 रुपये मिलते थे, अब पांच सौ रुपये दिए जा रहे हैं। खास बात, अगर निशाना ठीक लगा तो ही वह राशि मिलेगी। हैंड ग्रेनेड का अधिक इस्तेमाल होने के पीछे अहम वजह यह है कि इसमें सबूत नहीं मिलता और नुकसान कई गुणा ज्यादा हो जाता है।

बुधवार को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में आतंकियों ने सीआरपीएफ के गश्ती दल पर हमला कर दिया था। इस हमले में पांच जवान शहीद हो गए, जबकि कई जवान घायल हैं। बताया गया है कि आतंकियों ने इस हमले में फायरिंग के अलावा हैंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया था।

आतंकियों ने हमले की शुरुआत ही हैंड ग्रेनेड फेंक कर की थी। पाकिस्तानी आतंकी संगठन अल मुजाहिदीन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। मुश्ताक जरगर इस संगठन का सरगना बताया गया है।

बालाकोट एयर स्ट्राइक के दौरान वह भारतीय सुरक्षा बलों के निशाने पर था। ये वही है मुश्ताक जरगर है, जिसे भारत सरकार ने 1999 में आईसी-814 विमान के अपहृत यात्रियों को छोड़ने के बदले रिहा किया था। उस वक्त जरगर के साथ मसूद अजहर और शेख उमर को भी छोड़ा गया था।