कश्मीर में पर्यटन उद्योग में लौटी बहार, पिछले 2 महीने में घाटी पहुंचे 52 हज़ार पर्यटक

कश्मीर में दो महीने की कड़ाके की ठंड और बारबारी के बीच 52,000 से अधिक पर्यटक कश्मीर पहुंचे हैं और उनमें से ज्यादातर ने गुलमर्ग के प्रसिद्ध स्कीइंग स्थल को चुना है. पर्यटकों की कम आमद के चलते घाटी में पर्यटन उद्योग पिछले कुछ वर्षों से हिचकोले ले रहा है, लेकिन इस साल एकदम से पर्यटकों की बढ़ोतरी होने से घाटी में पर्यटन से जुड़े लोगों की उम्मीद बंधी है. पर्यटन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर 2018 में लगभग 28,000 पर्यटक आए हैं और जनवरी में लगभग 24000 पर्यटक कश्मीर पहुंचे हैं. इन पर्यटकों का मुख्य आकर्षण रही है घाटी में हुई भारी बर्फ़बारी. खासकर पर्यटन स्थलों पर जिसके कारण यहां बर्फ पर खेली जाने वाले खेलों को बढ़ावा मिला.

नासिर वाणी पर्यटन निर्देशक का कहना है, “जितनी बर्फ़बारी होती है, इससे हमारे खेलों स्कीइंग या अन्य खेलों को बढ़ावा मिलता है. शुक्र है कि हमें इस साल बहुत पर्यटक देखने को मिले. जितनी संभावना थी, उतने तो नहीं आए मगर पिछले सालों के मुकाबले बहुत अच्छा रहा.”

पर्यटन विभाग अब गुलमर्ग के अलावा बाकी पर्यटन स्थलों को भी सर्दियों में पर्यटकों के लिए आकर्षित बनाना चाहते हैं और इस सिलसिले में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने राज्य के लिए एक प्रपोज़ल को मंज़ूर भी दी है. इसके तहत गुलमर्ग और अन्य जगहों पर स्किंग स्लोप्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया जाएगा ताकि यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता आयोजित की जा सके. बहुत जल्द इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू होने की उम्मीद है.

पर्यटक स्कीइंग और अन्य शीतकालीन खेलों के लिए सर्दियों में गुलमर्ग पहुंचे हैं. विदेशी पर्यटकों के आगमन में 45 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और उम्मीद है कि आने वाले सीज़न में और अधिक आगमन रहेगा. 2019 में, बांग्लादेश, थाईलैंड और मलेशिया से पर्यटकों का आगमन भी बढ़ा है. गुलमर्ग में आजकल देश विदेश के पर्यटकों का तांता लगा हुआ है. गुलमर्ग में 100 प्रतिशत होटल बुकिंग है. कोई स्की कर रहा है तो कोई गंडोला केबल कार की सवारी हर तरफ पर्यटकों की बहार दिख रही है.

दिल्ली से आए पर्यटक अभिषेक कहते हैं, “बर्फबारी में बहुत मज़ा आ रहा है. हमने बहुत एन्जॉय किया. स्कीइंग की गंडोला जा रहे है, सच में जन्नत है.”

पिछले साल, लगभग 829,526 पर्यटकों ने घाटी आए थे. पर्यटन उद्योग में चल रहे संकट ने सैकड़ों लोगों को बेरोजगार कर दिया है और कई पर्यटन से जुड़े लोगों ने अपने व्यवसायों का रुख करने को मजबूर कर दिया. पर्यटन को वापस पटरी पर लाने के लिए पर्यटन विभाग, हेरिटेज पर्यटन, ईको-पर्यटन, पिलग्रिम पर्यटन, एडवेंचर पर्यटन और सफारी पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. इन परियोजनाओं के लिए, प्रत्येक जिलों में स्थलों की पहचान की जाएगी और इन्हें विकसित किया जाएगा.

विभाग ने इन कार्यों के लिए 100 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधन किया है. सरकार ने 2015 में पीएम विकास पैकेज के तहत पर्यटन के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 2000 करोड़ घोषित किए थे. पहले चरण में पर्यटन विभाग 400 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम कर रहा है.