जम्‍मू-कश्‍मीर में वर्ष 2018 में 80 प्रतिशत बढ़ी आतंकी हिंसा, बालाकोट का भी असर दिखा

आतंकवाद प्रभावित जम्‍मू-कश्‍मीर में आतंकी हिंसा और आतंकवादियों के मारे जाने की घटनाओं में वर्ष 2018 में वर्ष 2017 की अपेक्षा क्रमश: 80 और 21 प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी हुई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक इसी अवधि के दौरान सीमा पार से घुसपैठ में करीब 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में महत्‍वपूर्ण बात यह है कि इस साल पहले तीन महीने में आतंकी घुसपैठ की 23 कोशिशें हुईं जिसमें से केवल 7 सफल रहीं।

बता दें कि यह वही समय है जब एयरफोर्स ने पाकिस्‍तान के बालाकोट में आतंकी शिविर पर बम गिराए थे। सूत्रों ने बताया कि घुसपैठ की ज्‍यादातर कोशिश बालाकोर्ट एयर स्‍ट्राइक के पहले की अवधि की है। जम्‍मू-कश्‍मीर में वर्ष 2018 में घुसपैठ के प्रयास की कुल 328 घटनाएं सामने आईं। इनमें से 143 सफल रही है। वर्ष 2017 में घुसपैठ के कुल 419 प्रयास किए गए, जिसमें से 136 सफल रहे थे।

कुल 116 आतंकवादी वारदात
इस साल के पहले तीन माह में जम्‍मू-कश्‍मीर में आतंकी वारदातों के आंकड़ों के मुताबिक कुल 116 घटनाएं हुईं। इसमें 59 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए और 9 आम नागरिक भी मारे गए। इन हमलों में 62 आतंकी भी मारे गए। वर्ष 2018 में हिंसा की कुल 614 (वर्ष 2017 में 342) घटनाएं हुईं। इसमें 91 (वर्ष 2017 में 80) सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए और 39 आम नागरिक भी मारे गए। साल 2018 में 257 आतंकवादियों को सुरक्षा बलों ने मार‍ गिराया। वर्ष 2017 में कुल 213 आतंकवादी मारे गए थे।

वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि जम्‍मू-कश्‍मीर में वर्ष 1990 में आतंकवाद शुरू होने के बाद से 31 मार्च 2019 तक 14024 आम आदमी और 5273 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं। उधर, नक्‍सली हिंसा के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 5 साल में राष्‍ट्रीय नीति और सरकार के ऐक्‍शन प्‍लान के बेहतरीन क्रियान्‍वयन की वजह से न केवल माओवादी हिंसा में कमी आई है बल्कि उनका भौगोलिक प्रभाव क्षेत्र भी स‍िमट गया है।

माओवादी हिंसा में 26.7 प्रतिशत की कमी
गृह मंत्रालय ने बताया कि माओवादी हिंसा की घटनाओं में वर्ष 2013 के बाद से 26.7 प्रतिशत की कमी आई है। इस अवधि के दौरान हिंसा की कुल घटनाएं 1136 से घटकर 833 पहुंच गई। इसी दौरान माओवादी हिंसा में मरने वालों की संख्‍या में भी 39.5 प्रतिशत (392 से 240) की कमी आई है। छत्‍तीसगढ़ में 392 घटनाएं और 153 मौतें और झारखंड में 205 घटनाएं और 43 मौतें हुईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्‍तर-पूर्व में सुरक्षा स्थिति बेहतर हुई है।