लद्दाख में भाजपा को झटका, 5 काउंसिलरों ने छोड़ी पार्टी

जम्मू-कश्मीर में होने वाले संसदीय चुनाव में लद्दाख की सीट जीतने की जंग लड़ने की तैयारी कर रही भारतीय जनता पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है। लद्दाख को यूनियन टेरेटरी बनाने की मांग नजरअंदाज होने के बाद विरोध में थुप्स्तन छिवांग के सांसद पद व भाजपा से त्यागपत्र देने के बाद अब लेह हिल डेवेलपमेंट काउंसिल में भाजपा के 5 काउंसिलरों ने भी पार्टी छोड़ दी है। हालांकि इस्तीफा देने वाले काउंसिलरों को मनाने की कोशिश की जा रही है। प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र उन्हें इस्तीफा वापस लेने के लिए राजी कर रहे हैं। पार्टी ने इन इस्तीफों को गंभीरता से लिया है। यह स्पष्ट संकेत है कि यूनियन टेरेटरी की मांग को केंद्र सरकार के नजरअंदाज करने के बाद क्षेत्र में रोष बड़ता जा रहा है। थुप्स्तन छिवांग ने भी भाजपा पर लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं को नजरअदांज करने का आरोप लगाते हुए संसदीय सीट व भाजपा से इस्तीफा दिया था।

इस्तीफा देने वालों में दोरजे मोटुप भी शामिल

इस्तीफा देने वाले पांच काउंसिलरों में हिल काउंसिल के पूर्व चीफ एग्जीक्यूटिव काउंसिलर दोरजे मोटुप भी शामिल हैं। भाजपा ने स्थानीय निकाय चुनाव में लेह म्यूंसिपल काउंसिल की सभी कांग्रेस के हाथों हारने के बाद दोरजे मोटुप को चीफ एग्जीक्यूटिव काउंसिलर के पद से हटा दिया था। उनकी जगह युवा नेता जाम्यिांग सीरिंग नाम्गयाल को चीफ एग्जीक्यूटिव काउंसिलर बना दिया गया था। अब मोटुप व चार अन्य काउंसिलरों ने भाजपा हाईकमान पर क्षेत्र के हितों व नेताओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी है।

 थुप्तान छिवांग को मनाने के लिए कुछ नहीं किया

काउंसिलरों का आरोप है कि पार्टी ने थुप्सतान छिवांग को मनाने के लिए कुछ नही किया। इसके साथ ये काउंसिलर, पार्टी कार्यकताओं के प्रदर्शन को नजरअंदाज करने व हिल काउंसिल में चांगथांग इलाकों को प्रतिनिधित्व ने दिए जाने से भी नाराज हैं। मोटुप के साथ भाजपा से इस्तीफा देने वालों में सासपोल के काउंसिलर सीरिंग आंगदुस, तेमिसगाम के सीरिंग मोटुप मुख्य हैं।उनके साथ चुशुल व दुरबुक इलाके से भाजपा के काउंसिलरों ने भी वीरवार को इस्तीफा दे दिया है। भाजपा के एमएलसी विक्रम रंधावा ने पांच काउंसिलरों के भाजपा से इस्तीफा देने की पुष्टि की है।

वर्ष 2014 में 36 वोटों से जीती थी भाजपा

वर्ष 2014 में भी क्षेत्र में भाजपा की अप्रत्याशित थी। भाजपा के उम्मीदवार थुप्स्तन छिवांग महज 36 वोटों के अंतर से निकटतम प्रतिद्वंदी निर्दलीय गुलाम रजा से चुनाव जीते थे। इस जीत में लद्दाख के सविर्स वोटरों की भूमिका अहम रही थी। भाजपा के थुप्स्तन छिवांग को 31,111 वोट मिले थे। उनके निकटतम प्रतिद्वंदी निर्दलीय गुलाम रजा को मात्र 31075 वोट तो कांग्रेस के सीरिंग सैंफल काे 26,402 वोट मिले थे। वर्ष 1967 के बाद से कांग्रेस ने लद्दाख की संसदीय सीट छह बार जीती है। अब थुप्स्तन छिवांग के भाजपा पर लद्दाख की आकांक्षाओं से खिलवाड़ का आरोप लगाते हुए सांसद के पद से व भाजपा से इस्तीफा दे दिया है। यह भाजपा के लिए बड़ा झटका था। छिवांग वर्ष 2004 के संसदीय चुनाव में यूनियन टेरेटरी के मुद्दे पर निर्दलीय रूप से चुनाव लड़कर पहली बार लद्दाख के सांसद बने थे।

लेह में डूब रहा भाजपा का जहाज

रिगजिन जोरा का कहना कि लद्दाख में भाजपा का जहाज डूब रहा है। पार्टी के सांसद के बाद उनके समर्थकों के भी इस्तीफा देना इसका सबूत है। क्षेत्र के निवासी भाजपा के झूठे वायदों से निराश हो गए हैं। ऐसे में इस वर्ष संसदीय चुनाव में कांग्रेस की जीत तय है। इसका सबूत लेह में स्थानीय निकाय चुनाव व पंचायत चुनाव में कांग्रेस की एकतरफा जीत है। भाजपा ने लद्दाखियों को झूठे ख्वाब दिखाने के सिवा कुछ नही किया है। अब इस पार्टी को किए की सजा मिलेगी।