लद्दाख: COVID19 लैब बनकर तैयार, मरीजों की सैंपल टेस्ट करने के लिए नहीं है कोई माइक्रोबायोलॉजिस्ट

कोरोना की जंग में देश भर में सरकार नए नए कदम उठा रही है लेकिन ज़मीन पर हकीक़त कुछ और ही है. तमाम कोशिशों के बावजूद भी ज़मीन पर कोरोना से जंग में अब भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसा एक मामला लद्दाख से सामने आया है जहां लाखों की लागत से बना कोरोना लैब बंद पड़ा है.

लद्दाख में कोरोना का पहला मामला 15 मार्च को सामने आया था और इसके बाद प्रशासन ने काफी जल्दी जल्दी कदम उठा कर संक्रमण को रोका. पूरे लद्दाख को लॉकडाउन करके बंद कर दिया गया और कुछ दिन बाद हवाई सेवाए भी बंद हो गईं. लेकिन इसके बाद प्रशासन के लिए समस्याएं कई गुना बढ़ गईं. लद्दाख में कोरोना टेस्टिंग का कोई भी इन्तज़ाम ना होने के कारण जंग एकदम से रुक गयी. लद्दाख के सभी कोरोना मामलों के टेस्ट या तो दिल्ली या फिर पुणे की टेस्टिंग लैब में भेजे जाते थे और हवाई संपर्क टूट जाने के बाद यह काम लगभग रुक गया.

मार्च के तीसरे हफ्ते में ही केंद्र सरकार ने कोरोना लैब बनाने के लिए ज़रूरी सामान भेज दिया और सिथान्य प्रशासन ने भी लैब बना दी. 25 मार्च के आस पास लद्दाख में संक्रमण से लड़ने के लिए पहली COVID19 लैब भी शुरू हो गई.

खुद लदाख के सांसद Jamyang Tsering Namgyal ने इसकी जानकारी दी थी . नामग्याल ने ट्वीट कर कहा था कि लद्दाख में टेस्टिंग की सुविधा ना होने के कारण कोरोना सैंपल पुणे भेजे जा रहे थे जिस से रिजल्ट आने में देरी हो जाती थी लेकिन अब सभी टेस्ट लदाख में ही हो सकेंगे जिसके लिए ज़रूरी सामान जैसे Real Time-PCR Machine और Thermo Cycler और ऐसे सॉफ्टवेर से लैस कंप्यूटर जो कोरोना के टेस्ट का आंकलन तेज़ी से कर सकते हैं उपलब्ध कराए गए हैं.

लेकिन हकीकत कुछ और है, आज अप्रैल के मध्य में भी यह टेस्टिंग लैब शुरू नहीं हो सकी है. लदाख के कमिश्नर सेक्रेटरी रिगजिन सेम्फाल के अनुसार ना चाहते हुए भी सरकार के पास इस लैब को बंद रखने के अलावा कोई और चारा नहीं है. सेम्फाल के अनुसार लैब को बहुत जल्दी बना लिया गया था लेकिन पूरे लद्दाख में एक भी माइक्रोबायोलॉजिस्ट ना होने के कारँ लैब को शुरू नहीं किया जा सकता और नया माइक्रोबायोलॉजिस्ट नियुक्त करने में काफी समय लगेगा. इसलिए सरकार अब इस बात पर विचार कर रही है कि किसी एक टेक्निशियन को यह लैब चलाने की ट्रेनिंग देकर इसको शुरू किया जाए.

लद्दाख प्रशासन से इस से खुश है कि क्षेत्र में संक्रमण मुक्त करने की तरफ वह केवल एक कदम दूर है. लदाख में संक्रमित 15 लोगों में से 13 पूरी तरह ठीक हो चुके हैं जबकि प्रदेश के दो जिलों में से केवल लेह में संक्रमण के दो मामले सामने आए हैं जिनके ठीक होने के बाद लद्दाख को संक्रमण मुक्त – मतलब ग्रीन जोन – में घोषित हो जाएगा.

ऐसे में अगर 14 अप्रैल के बाद लॉकडाउन हट जाता है और लदाख को आम लोगों के लिए खोल दिया जाता है तो समस्याएं किस हद तक बढ़ सकती है इसका केवल अंदाज़ा लगाया जा सकता है.