भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर आज दोनों देशों के बीच कमांडर स्तर की बैठक

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास करीब एक महीने से जारी तनाव के बीच आज भारत और चीन के बीच बैठक होने जा रही है। भारत और चीन के अधिकारियों के बीच आज सुबह बड़ी बैठक होने जा रही है। पूर्वी लद्दाख में एलएसी के साथ चल रहे विवाद पर चर्चा करने के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के चीनी क्षेत्र मोल्डो में आज भारत और चीन के सैन्य कमांडरों की बैठक होगी। इस बैठक में भारत और चीन के बीच लद्दाख में एक महीने से जारी गतिरोध को खत्म करने की कवायद की जाएगी।

भारतीय सेना के सूत्रों ने बताया कि सीमा विवाद को लेकर तनातनी के बीच भारत और चीन के बीच लेफ्टिनेंट जनरल लेवल की बातचीत आज होगी। लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह अपने समकक्ष चीनी मेजर जनरल लियू लिन के साथ एलएसी पर इस विवाद के खात्मे का रास्ता ढूंढेंगे। लिन चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के दक्षिण झिंजियांग सैन्य क्षेत्र के कमांडर हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की वार्ता

यह बैठक लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की होगी। इस बैठक में भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व 14वीं कॉर्प के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह करेंगे। वह चीनी सेना के अधिकारी मेजर जनरल लियू लिन के साथ बातचीत करेंगे। चीनी सेना की ओर से मेजर जनरल लियू लिन इस बैठक में भाग लेंगे। मेजर जनरल लियू लिन चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के दक्षिण झिंजियांग सैन्य क्षेत्र के कमांडर हैं।

कौन हैं हरिंदर सिंह ?

भारत की ओर से इस बैठक में लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व करेंगे। लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह लेह स्थित 14वीं कॉर्प्स के कमांडर हैं जो चीनी अधिकारियों के साथ बातचीत में भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व करेंगे। ‘फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स’ के उपनाम वाली 14वीं कॉर्प्स भारतीय सेना की उधमपुर स्थित उत्तरी कमान का हिस्सा है। यह कमान सबसे जोखिम भरी चुनौतियों का सामना करती है। लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह आतंकवाद रोधी विशेषज्ञ कमांडर मानें जाते हैं। उन्‍होंने पिछले साल अक्टूबर में 14वीं कॉर्प्स की कमान संभाली थी। उन्होंने भारतीय सेना में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है।

कई राउंड की बातचीत में हल नहीं हो सका है मसला

पूर्वी लद्दाख में जारी गतिरोध को लेकर अभी तक दोनों सेनाओं के बीच 10 राउंड तक की बातचीत हो चुकी है। 2 जून को भी दोनों सेनाओं के अधिकारियों के बीच इस मसले पर बातचीत हुई थी लेकिन अभी तक किसी भी बातचीत का कोई खास नतीजा सामने नहीं आया है।

हालांकि, इस बीच उस क्षेत्र में दोनों सेनाएं कुछ दूर तक पीछे जरूर हटी हैं। अभी भी टकराव की नौबत खत्‍म नहीं हुई है। चीन ने तिब्बत में सैन्य अभ्यास कर अपनी सेना के पांच हजार जवानों को उत्‍तरी लद्दाख सेक्‍टर में तैनात कर दिया है। इसके जवाब में भारतीय सेना ने भी तैनाती बढ़ाई है।

जानें क्या है विवाद?

चीन ने लद्दाख के गलवान नदी क्षेत्र पर अपना कब्जा बनाए रखा है। यह क्षेत्र 1962 के युद्ध का भी प्रमुख कारण था। जमीनी स्तर की कई दौर की वार्ता विफल हो चुकी है। सेना को स्टैंडिंग ऑर्डर्स का पालन करने को कहा गया है। इसका मतलब है कि सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी)से घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए बल का इस्तेमाल नहीं कर सकती है। बता दें कि भारत चीन के साथ 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। ये सीमा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुज़रती है। ये तीन सेक्टरों में बंटी हुई है। पश्चिमी सेक्टर यानी जम्मू-कश्मीर, मिडिल सेक्टर यानी हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड और पूर्वी सेक्टर यानी सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश।