कश्मीर मसले का हल बंदूक से नहीं निकल सकता: महबूबा मुफ्ती

पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर के मसले का हल बंदूक से नहीं निकल पाएगा। इसके लिए बातचीत का एक अच्छा माहौल बनाने की जरूरत है।

सुरक्षा बलों की पिटाई से घायल एक युवक का एसएमएचएस अस्पताल में हाल जानने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जिस तरह से प्रधानमंत्री ने कहा कि घाटी में आतंकियों की कमर तोड़ देंगे तो मैं यह कहना चाहूंगी कि जम्मू कश्मीर एक सियासी मसला है इसका मिलिट्री हल नहीं है। जब तक यहां बातचीत का माहौल नहीं बनाया जाएगा समस्या का हल नहीं होगा।

कहा कि मेरा मानना है कि मेजर शुक्ला के बारे में कहा जाता है कि वह एक बहादुर जवान हैं। तो यह कैसा जवान है जो अपने ही बच्चों को, जम्मू कश्मीर के रहने वाले लड़कों के साथ इतनी ज्यादती और जुल्म कर रहा है।

कैंप में बुलाकर उसकी इतनी पिटाई करना कि वह अस्पताल पहुंच जाए, इसे बहादुरी नहीं कहेंगे। मैं उम्मीद करती हूं कि राज्यपाल, सेना अध्यक्ष, कोर कमांडर इस बात का संज्ञान लेंगे और इस मामले में मेजर शुक्ला से पूछताछ की जाएगी कि आखिर उसकी इतनी पिटाई क्यों की गई।

महबूबा ने कहा कि यह बच्चा पहले से यतीम है, इसका भाई फौज में है। अगर उन लोगों का यह हाल होगा जिनके परिजन फौज में हैं तो एक आम कश्मीरी का क्या हाल होगा।

पुलवामा के शादीमर्ग का तौसीफ अहमद (20) का इलाज एसएमएचएस में चल रहा है। उसका आरोप है कि सेना की 44 आरआर के मेजर शुक्ला ने उसे शादीमर्ग कैंप में बुलाया और उसकी पिटाई की।

उसे कहा गया कि कपड़े उतारकर बंदूक लेकर फोटो खिंचवाए। अगर फोटो नहीं खिंचवाएगा तो उसका एनकाउंटर कर दिया जाएगा। उसका यह भी कहना है कि जब उसकी पिटाई की जा रही थी तो दो जवान उसकी वीडियो भी बना रहे थे।