कश्मीर में स्थाई निवास प्रमाणपत्र के नियमों में बदलाव की आहट, मचा बवाल तो राज्यपाल ने दी सफाई

 जम्मू कश्मीर प्रदेश कांग्रेस और पीपुल्स कांफ्रेंस ने रविवार को कहा कि राज्य में स्थायी निवास प्रमाणपत्र (पीआरसी) प्रदान करने की प्रक्रिया में किसी तरह का बदलाव उन्हें अस्वीकार्य होगा. इससे पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि राज्य प्रशासन पीआरसी प्रदान करने की प्रक्रिया आसान करने पर विचार कर रहा है. लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत इसे जारी करने के लिए एक समय सीमा तय की जानी चाहिए.

हालांकि, विवाद शुरू होने पर राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि स्थाई निवास प्रमाणपत्र की प्रक्रिया में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि हितधारकों से संपर्क किए बगैर नियमों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा.

 

नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) ने रविवार को कहा कि इस प्रक्रिया में बदलाव लाने वाले किसी भी कदम का विरोध किया जाएगा. कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘पीआरसी(नियमों) में किसी तरह का बदलाव कांग्रेस पार्टी को अस्वीकार्य होगा.’’ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने चेतावनी दी कि पीआरसी नियमों में किसी तरह का बदलाव राज्य के हित में नहीं होगा और इसके गंभीर परिणाम होंगे.

 

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, ‘‘यह कदम राज्य में समस्या को और बढ़ाएगा, इसलिए शांति व्यवस्था के व्यापक हित में यह कदम उठाने से बचना चाहिए.’’उन्होंने कहा कि राज्य विधानसभा भंग कर दी गई है. राज्यपाल नीत प्रशासन के पास राज्य के संवैधानिक मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है.

वहीं, पीपुल्स कांफ्रेंस प्रमुख सज्जाद लोन ने भी कहा है कि प्रशासन को शासन के कार्य तक खुद को सीमित रखना चाहिए. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि पीआरसी या जम्मू कश्मीर बैंक से जुड़ा कोई भी संरचनात्मक बदलाव स्वीकार्य नहीं होगा. गौरतलब है कि संविधान का अनुच्छेद 35 ए जम्मू कश्मीर विधानसभा को यह शक्ति देता है कि वह राज्य के स्थायी निवासियों को परिभाषित करे, जो विशेष अधिकारों और विशेषाधिकारों के लिए योग्य हैं.