कश्मीर बंद के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित, अलगाववादी नेता घरों में रहे नजरबंद

कश्मीर घाटी में अलगाववाद और आतंकवाद की नींव रखने वालों में शुमार मोहम्मद मकबूल बट की बरसी पर सोमवार को अलगाववादियों के बंद का असर सामान्य जनजीवन पूरी तरह नजर आया। मीरवाईज मौलवी उमर फारुक और मोहम्मद अशरफ सहराई समेत लगभग एक दर्जन अलगाववादियों को उनके घरों में नजरबंद करने के अलावा बनिहाल-बारामुला रेल सेवा को भी एहतियातन बंद रखा गया है। जेकेएलएफ चेयरमैन मोहम्मद यासीन मलिक बीते तीन दिनों से कोठीबाग पुलिस स्टेशन की हवालात में बंद हैं। इस बीच,किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए प्रशासन ने श्रीनगर के डाऊन-टाऊन समेत वादी के सभी संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा का कड़ा बंदोबस्त किया गया है।

गौरतलब है कि आज मोहम्मद मकबल बट की 35वीबरसी है। हुर्रियत कांफ्रेंस समेत विभिन्न अलगाववादी संगठनों के साझा मंच ज्वायंट रजिस्टेंस लीडरशिप जेआरएल ने मकबूल बट की बरसी के सिलसिले में 11 फरवरी को कश्मीर बंद का आहवान कर रखा है। बट को 11 फरवरी 1984 को तिहाड़ में फांसी दी गई थी। वह उत्तरी कश्मीर में जिला कुपवाड़ा के त्रेहगाम के रहने वाले थे। बीती शाम त्रेहगाम और कुपवाड़ा में लोगों ने एक मशाल रैली भी निकाली थी। वह जेकेएलएफ के संस्थापक माने जाते हैं।

अलगाववादियों के बंद का असर आज सुबह से ही पूरे कश्मीर में नजर आया। सभी दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। सड़कों पर वाहनों की आवाजाही नाममात्र रही। शिक्षण संस्थान भी बंद रहे। सरकारी कार्यालयों में हालांकि अवकाश नहीं था,लेकिन अलगाववादियों के बंद का असर कार्यालयों में कर्मियों की उपस्थिति पर नजर आया और सरकारी कामकाज प्रभावित रहा। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बनिहाल-बारामुला रेल सेवा को बंद रखा है।

इसके अलावा मीरवाईज मौलवी उमर फारुक,सईद अली शाह गिलानी, हिलाल वार, मोहम्मद अशरफ सहराई, आगा सईद हसन बडगाम, इम्तियाज अहमद, मोहम्मद अशरफ लाया, यासमीन रजा और जफर अकबर फतेह समेत सभी प्रमुख अलगाववादी नेताओं को उनके घरों में नजरबंद कर दिया। इसके अलावा पुलिस ने जेकेएलएफ के एक दर्जन कार्यकत्ताZओं को जुलूस निकालने काप्रयास करने पर हिरासत में ले लिया।