कश्मीर में जानलेवा बन रहा स्वाइन फ्लू

राज्य के कई भागों विशेषकर कश्मीर में इस समय कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इससे ठंड के कारण होने वाले रोग भी बढ़ रहे हैं। इनमें हृउस रोग और स्वाइन फ्लू सबसे अधिक है। इस साल के पहले दस दिनों में स्वाइन फ्लू के ग्यारह मरीज कश्मीर के अस्पतालों में आए हैं। इनमें तीन श्री महाराजा हरि सिंह अस्पताल और आठ शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल सांइसेस में भर्ती हैं। सभी का उपचार चल रहा है। इनमें से एक की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। वहीं कश्मीर में पिछले साल अक्टूबर महीने से अब तक सात लोगों की स्वाइन फ्लू से मौत हो चुकी है जबकि 69 लोग स्वाइन फ्लू से पीड़ित हुए हैं। जम्मू में इस दौरान एक संदिग्ध मरीज ही मेडिकल कालेज में इलाज के लिए आया। उसमें भी स्वाइन फ्लू की पुष्टि नहीं हुई है। शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल सांइसेस के अधिकारियों के अनुसार सात लोगों की अभी तक इस बीमारी से मौत हुई है। डाक्टर्स एसोसिएशन कश्मीर के प्रधान डा. निसार का कहना है कि कश्मीर में स्वाइन फ्लू के मरीज और भी हो सकते हैं। कई लोगों को इस बीमारी की जानकारी नहीं है और कई अस्पतालों में इलाज के नहीं आ पाते हैं।

संक्रामक बीमारी है स्वाइन फ्लू

स्वाइन फ्लू एक तेजी से फैलने वाली संक्रामक बीमारी है जिससे बचने के लिए आपको इसके बारे में जानकारी होना बेहद आवश्यक है। स्वाइन फ्लू एक विशिष्ट प्रकार के एंफ्लुएंजा वाइरस (एच-1एन-1) द्वारा होता है। प्रभावित व्यक्ति में सामान्य मौसमी सर्दी-जुकाम जैसे ही लक्षण होते हैं। जैसे नाक से पानी बहना या नाक बंद हो जाना। गले में खराश, सर्दी-खांसी, बुखार, सिरदर्द, शरीर दर्द, थकान, ठंड लगना, पेटदर्द। कभी-कभी दस्त उल्टी आना भी शामिल है। कम उम्र के व्यक्तियों, छोटे बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को यह तीव्र रूप से प्रभावित करता है। इसका संक्रमण रोगी व्यक्ति के खांसने, छींकने आदि से निकली हुई द्रव की बूंदों से होता है। रोगी व्यक्ति मुंह या नाक पर हाथ रखने के पश्चात जिस भी वस्तु को छूता है, पुन: उस संक्रमित वस्तु को स्वस्थ व्यक्ति द्वारा छूने से रोग का संक्रमण हो जाता है। संक्रमित होने के पश्चात 1 से 7 दिन के अंदर लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं।

बचाव के लिए उठाए यह कदम

स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए लोगों को इन चीजों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। वह खांसी, जुकाम, बुखार के रोगी दूर रहें। आंख, नाक, मुंह को छूने के बाद किसी अन्य वस्तु को न छुएं व हाथों को साबुन या एंटीसेप्टिक द्रव से धोकर साफ करें। खांसते, छींकते समय मुंह व नाक पर कपड़ा रखें। सहज एवं तनावमुक्त रहिए। तनाव से रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता कम हो जाती है जिससे संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है। स्टार्च (आलू, चावल आदि) तथा शर्करायुक्त पदार्थों का सेवन कम करिए। इस प्रकार के पदार्थों का अधिक सेवन करने से शरीर में रोगों से लडऩे वाली विशिष्ट कोशिकाओं (न्यूट्रोफिल्स) की सक्रियता कम हो जाती है। दही का सेवन नहीं करें, छाछ ले सकते हैं। खूब उबला हुआ पानी पीयें व पोषक भोजन व फलों का उपयोग करें। सर्दी-जुकाम, बुखार होने पर भीड़भाड़ से बचें एवं घर पर ही रहकर आराम करते हुए उचित (लगभग 7-9 घंटे) नींद लें।

स्वाइन फ्लू के लिए घरेलू उपचार

स्वाइन फ्लू होने पर आप घरेलू उपचार भी कर सकते हैं। आयुर्वेदिक पेय (काढ़ा) पियें। इसे बनाने के लिए डेढ़ कप पानी लेकर उसमें हल्दी पाउडर (एक चम्मच), कालीमिर्च (तीन दाने), तुलसी के पत्ते (दो), थोड़ा जीरा, अदरक, थोड़ी चीनी को उबाल लें। एक कप रह जाने पर उसमें आधा नींबू निचोड़ दें। इसे गुनगुना ही सेवन करें। इसे दिन में 2-3 बार लिया जा सकता है। नाक में दोनों तरफ तिल तेल की 2-2 बूंदें दिन में 3 बार डालें। इसके अलावा रोजाना 2 से 3 तुलसी पत्तों का सेवन भी कर सकते हैं। गिलोय का काढ़ा या ताजा गिलोय का रस 20 मिली प्रतिदिन पीयें। स्वाइन फ्लू जैसे बुखार गले में खराब, सर्दी-जुकाम, खांसी व कंपकंपी आना, इनमें से कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत अपने चिकित्सक से परामर्श लें। कपूर, इलायची, लौंग मिश्रण (पाउडर) को रूमाल में बांधकर रख लें व सूंघते रहें। संक्रमण का खतरा कम होता है। यही नहीं अमृतधारा की 1-2 बूंदें रूमाल अथवा रूई पर लगाकर बार-बार सूंघते रहने से भी स्वाइन फ्लू से बचाव होता है।