Lockdown 2.0: जम्मू-कश्मीर में साकार हुआ “अतिथि देवो भव:”, लोगों ने घरों में दी पर्यटकों को शरण

कोरोना वायरस का ऐसा कहर है कि इसने इंसान को झकझोर कर रख दिया है। एहतियात के तौर पर दो लॉकडाउन लगे तो मानों जिंदगी थम सी गई है। लेकिन इन विषम परिस्थितियों में किसी चीज को सबसे ज्यादा जिंदा रखने की जरुरत है तो वह है इंसानियत और प्रेम। देश में मानवता को जाहिर करने वाले अनेकों उदाहरण सामने आ रहे हैं, लेकिन हम बात कर रहे हैं जम्मू-कश्मीर की। जहां स्थानीय लोगों ने लॉकडाउन के दौरान पर्यटकों को शरण देकर अतिथि देवो भव: की मिसाल को कायम किया है।


मुंबई निवासी 30 वर्षीय जावेद राशिद शेख अपनी मां खतीजा के साथ पिछले महीने कश्मीर घूमने आए थे। ट्रेन से जम्मू पहुंचने के बाद दोनों श्रीनगर के एक होटल में जा रहे थे, उनकी टैक्सी को जवाहर सुरंग की पुलिस चौकी पर रोका गया। इसी बीच खतीजा तबीयत बिगड़ने लगी तो वह पंपोर में रहने वाले अपने रिश्तेदार के यहां चले गए। कुछ दिन यहां रुकने के बाद उन्होंने श्रीनगर में किसी परिचित के यहां जाने की सोची। 21 मार्च को दोनों मां—बेटा एक गली में बिना भोजन और पानी के भूखे प्यासे जा रहे थे तभी नाज़िर अहमद शेख नामक शख्स की नजर उन पर पड़ी। वह एक सरकारी कर्मचारी थे। दोनों लॉकडाउन में कहीं जा नहीं सकते थे यह बात उन्हें बताते हुए नाजिर दोनों को अपने घर ले आए। तब से जावेद और उनकी मां खतीजा वहीं रह रहे हैं। दोनों उनके व्यवहार से बड़े खुश हैं। उन्होंने कहा कि वे नाजिर के परिवार के साथ रहकर कश्मीर के स्थानीय व्यंजनों का आनंद ले रहे हैं।

पंपोर में समय गुजार रहे मां—बेटे

Lockdown 2.0: जम्मू-कश्मीर में साकार हुआ

जावेद ने कहा कि हम यहां केवल कुछ दिनों के लिए आए थे, लेकिन फंस गए और मुझे नहीं पता कि हम यहां कब तक रहने वाले हैं। मुझे उम्मीद है कि चीजें जल्द ही ठीक हो जाएंगी। लेकिन हम इस परिवार को याद करेंगे। वे अब मेरे परिवार की तरह हैं। उन्होंने कहा कि उनके पिता अब्दुल राशिद मुंबई से हर दिन फोन करते हैं और नजीर अहमद और उनके परिवार का बार-बार धन्यवाद करते हैं। मैं उनके प्यार और स्नेह को शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता। वे हमारे कपड़े धोते हैं और खाना खाने से पहले हमें खाना परोसते हैं। मेरी माँ को मधुमेह की कोई दवा नहीं थी। नाज़िर साहब का परिवार दवाइयाँ लेने निकला। यहां तक कि उन्होंने हमें मुंबई के लिए टिकट खरीदने की पेशकश की।


डाक्यूमेंट्री बनाने आए थे, लॉकडाउन में फंसे…

Lockdown 2.0: जम्मू-कश्मीर में साकार हुआ

इधर जम्मू संभाग के डोडा जिले में भद्रवाह से भी एक ऐसा ही मामला सामने आया जिसने लोगो का इंसयनियत में भरोसा दोगुना कर दिया है।दरअसल, एक फिल्म निर्माता नचिकेत गुट्टीकर पुणे से अपनी टीम के साथ डाक्यूमेंट्री बनाने के लिए जम्मू—कश्मीर आए थे। लॉकडाउन होने से सभी भद्रवाह में फंस गए। ऐसे में नजीम मलिक के परिवार ने उनकी मदद की। उन्होंने उन्हें रहने के लिए छत और खाने के लिए खाना दिया।

Lockdown 2.0: जम्मू-कश्मीर में साकार हुआ

नचिकेत ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि लॉकडाउन के बाद वह काफी डर गए थे। लेकिन नजीम और उनके परिवार ने उनकी सारी चिंता दूर कर दी। वहीं नजीम मलिक का पूरा परिवार इस बात से बेहद खुश हैं कि उन्हें दूसरों की मदद करने का मौका मिला। नजीम का कहना है कि ये कोई एहसान नहीं है। बल्कि हम ये सोचते हैं कि अगर कभी हमारे बच्चे भी ऐसी मुसीबत में फंस जाए तो कोई भी मदद के लिए जरूर हाथ बढ़ाएगा। लॉकडाउन जब तक खत्म नहीं होता तब तक वो उनकी सेवा करते रहेंगे।