मन की बात: पीएम मोदी बोले- देश की विकास यात्रा में शामिल हों सभी देशवासी

पीएम मोदी ने कहा कि कुछ दिनों बाद, पांच सितंबर को हम शिक्षक दिवस मनाएंगें. हम सब जब अपने जीवन की सफलताओं को अपनी जीवन यात्रा को देखते है तो हमें अपने किसी न किसी शिक्षक की याद अवश्य आती है. साथियो और विशेषकर मेरे शिक्षक साथियो, वर्ष 2022 में हमारा देश स्वतंत्रता के 75 वर्ष का पर्व मनाएगा. देश आज जिस विकास यात्रा पर चल रहा है इसकी सफलता सुखद तभी होगी जब हर एक देशवासी इसमें शामिल होगा, इस यात्रा का यात्री हो, इस पथ का पथिक हो, इसलिए, ये जरूरी है कि हर देशवासी स्वस्थ रहे सुखी रहे और हम मिलकर के कोरोना को पूरी तरह से हराएं. कोरोना तभी हारेगा जब आप सुरक्षित रहेंगे, जब आप ‘दो गज की दूरी, मास्क जरुरी’, इस संकल्प का पूरी तरह से पालन करेंगे. आप सब स्वस्थ रहिए, सुखी रहिए, इन्हीं शुभकामनाओं के साथ अगली मन की बात में फिर मिलेंगे.

पीएम मोदी ने कहा कि डॉग्स की आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू मिशन में भी बहुत बड़ी भूमिका होती हैं. भारत में तो एनडीआरएफ ने ऐसे दर्जनों डॉग्स को स्पेशली ट्रेन किया है. कहीं भूकंप आने पर, ईमारत गिरने पर, मलबे में दबे जीवित लोगों को खोज निकालने में ये बहुत एक्सपर्ट होते हैं. साथियो, मुझे यह भी बताया गया कि भारतीय नस्ल के डॉग्स भी बहुत अच्छे होते हैं, बहुत सक्षम होते हैं. पिछले कुछ समय में आर्मी, सीआईएसएफ, एनएसजी ने मुधोल हाउंड डॉग्स को ट्रेन्ड करके डॉग स्कवॉड में शामिल किया है, सीआरपीएफ ने कोंबाई डॉग्स को शामिल किया है. इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च भी भारतीय नस्ल के डॉग्स पर रिसर्च कर रही है.

पीएम ने कहा कि बीते दिनों, जब हम अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहे थे, तब एक दिलचस्प खबर पर मेरा ध्यान गया. ये खबर है हमारे सुरक्षाबलों के दो जांबाज किरदारों की. एक है सोफी और दूसरी विदा. कुछ समय पहले मुझे देश की सुरक्षा में डॉग्स की भूमिका के बारे में बहुत विस्तार से जानने को मिला. कई किस्से भी सुने. कुछ दिन पहले ही आपने शायद टीवी पर एक बड़ा भावुक करने वाला दृश्य देखा होगा, जिसमें, बीड पुलिस अपने साथी डॉग रॉकी को पूरे सम्मान के साथ आखिरी विदाई दे रही थी. रॉकी ने 300 से ज्यादा केसों को सुलझाने में पुलिस की मदद की थी.

पीएम मोदी ने कहा कि न्यूट्रिशन के इस आंदोलन में पीपुल पार्टिसिपेशन भी बहुत जरूरी है. जन-भागीदारी ही इसको सफल करती है. अगर आपको गुजरात में सरदार वल्लभभाई पटेल के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जाने का अवसर मिला होगा या कोविड के बाद आपको जाने का अवसर मिलेगा, तो, वहां एक यूनिक प्रकार का न्यूट्रिशन पार्क बनाया गया है. खेल-खेल में ही न्यूट्रिशन की शिक्षा वहां जरुर देख सकते हैं. साथियो, भारत एक विशाल देश है, खान-पान में ढेर सारी विविधता है.

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे बच्चे, हमारे विद्यार्थी, अपनी पूरी क्षमता दिखा पाएं, अपना सामर्थ्य दिखा पाएं, इसमें बहुत बड़ी भूमिका पोषण की भी होती है, पोषण की भी होती है. पूरे देश में सितंबर महीने को पोषण माह- पोषण माह के रूप में मनाया जाएगा. देश और पोषण का बहुत गहरा संबंध होता है. बच्चों के पोषण के लिए भी उतना ही जरूरी है कि मां को भी पूरा पोषण मिले और पोषण या न्यूट्रिशन का मतलब केवल इतना ही नहीं होता कि आप क्या खा रहे हैं, कितना खा रहे हैं, कितनी बार खा रहे हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि आप ये मत भूलिये कि आज जो दुनिया में बहुत बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ नज़र आती हैं ना, ये भी, कभी, स्टार्टअप हुआ करती उन्होंने कहा कु इसी तरह चिंगारी एप भी युवाओं के बीच काफी पॉपुलर हो रहा है. एक एप है आस्क सरकार. इसमें चैट बोट के जरिए आप इंटरेक्ट कर सकते हैं और किसी भी सरकारी योजना के बारे में सही जानकारी हासिल कर सकते हैं, वो भी टेक्स्ट, ऑडियो और वीडियो तीनों तरीकों से, ये आपकी मदद कर सकता है.

पीएम मोदी ने कहा कि भारतीयों के इनोवेशन और साल्यूशन देने की क्षमता का लोहा हर कोई मानता है और जब समर्पण भाव हो, संवेदना हो तो ये शक्ति असीम बन जाती है. इस महीने की शुरुआत में, देश के युवाओं के सामने, एक एप इनोवेशन चैलेंज रखा गया. उन्होंने कहा कि हो सकता है आप भी ऐसा कुछ बनाने के लिए प्रेरित हो जायें. इनमें एक ऐप है, कुटुकी किड्स लर्निंग ऐप. ये बच्चों के लिए ऐसा रोचक ऐप है जिसमें गानों और कहानियों के जरिए बच्चे मैथ साइंस में बहुत कुछ सीख सकते हैं. इसमें एक्टिवीटिज भी हैं, खेल भी.

पीएम मोदी ने कहा कि अब कंप्यूटर और स्मार्टफ़ोन के इस जमाने में कंप्यूटर गेम्स का भी बहुत ट्रेंड है. ये गेम्स बच्चे भी खेलते हैं, बड़े भी खेलते हैं. लेकिन, इनमें भी जितने गेम्स होते हैं, उनकी थीम्स भी अधिकतर बाहर की ही होती हैं. आत्मनिर्भर भारत अभियान में वर्चुअल गेम्स हों, ट्वाएड का सेक्टर हो, सभी ने, बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है. 100 वर्ष पहले, गांधी जी ने लिखा था कि –“असहयोग आन्दोलन, देशवासियों में आत्मसम्मान और अपनी शक्ति का बोध कराने का एक प्रयास है.”

पीएम मोदी ने कहा कि अब आप सोचिए कि जिस राष्ट्र के पास इतनी विरासत हो, परम्परा हो, विविधता हो, युवा आबादी हो, क्या खिलौनों के बाजार में उसकी हिस्सेदारी इतनी कम होनी, हमें, अच्छा लगेगा क्या? जी नहीं, ये सुनने के बाद आपको भी अच्छा नहीं लगेगा. पीएम ने कहा कि अब जैसे आन्ध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में श्रीमान सी.वी. राजू हैं. उनके गांव के एति-कोप्पका खिलौने एक समय में बहुत प्रचलित थे. इनकी खासियत ये थी कि ये खिलौने लकड़ी से बनते थे, और दूसरी बात ये कि इन खिलौनों में आपको कहीं कोई कोण नहीं मिलता था.सी.वी. राजू ने एति-कोप्पका ट्वाएड के लिये, अब, अपने गाँव के कारीगरों के साथ मिलकर एक तरह से नया मूवमेंट शुरू कर दिया है. बेहतरीन क्वालिटी के एति-कोप्पका खिलौने बनाकर सी.वी. राजू ने स्थानीय खिलौनों की खोई हुई गरिमा को वापस ला दिया है.

पीएम मोदी ने कहा कि साथियों, खिलौने जहां एक्टिविटी को बढ़ाने वाले होते हैं, तो खिलौने हमारी आकांक्षाओं को भी उड़ान देते हैं.बच्चों के जीवन के अलग-अलग पहलू पर खिलौनों का जो प्रभाव है, इस पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी बहुत ध्यान दिया गया है. उन्होंने कहा कि हमारे देश में लोकल खिलौनों की बहुत समृद्ध परंपरा रही है. कई प्रतिभाशाली और कुशल कारीगर हैं, जो अच्छे खिलौने बनाने में महारत रखते हैं.भारत के कुछ क्षेत्र खिलौनों के केन्द्र के रूप में भी विकसित हो रहे हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे किसानों ने कोरोना की इस कठिन परिस्थितियों में भी अपनी ताकत को साबित किया है. उन्होंने कहा कि कोरोना के इस कालखंड में देश कई मोर्चों पर एक साथ लड़ रहा है, लेकिन इसके साथ-साथ, कई बार मन में ये भी सवाल आता रहा कि इतने लम्बे समय तक घरों में रहने के कारण, मेरे छोटे-छोटे बाल-मित्रों का समय कैसे बीतता होगा. साथियो, हमारे चिंतन का विषय था- खिलौने और विशेषकर भारतीय खिलौने. हमने इस बात पर मंथन किया कि भारत के बच्चों को नए-नए खिलौने कैसे मिलें, भारत, खिलौनों के प्रोडक्शन का बहुत बड़ा हब कैसे बने.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में हो रहे हर आयोजन में जिस तरह का संयम और सादगी इस बार देखी जा रही है, वो अभूतपूर्व है.हम बहुत बारीकी से अगर देखेंगे, तो एक बात अवश्य हमारे ध्यान में आयेगी – हमारे पर्व और पर्यावरण.. इन दोनों के बीच एक बहुत गहरा नाता रहा है. इन दिनों ओणम का पर्व भी धूम-धाम से मनाया जा रहा है. ये पर्व चिंगम महीने में आता है. इस दौरान लोग कुछ नया खरीदते हैं, अपने घरों को सजाते हैं, पूक्क्लम बनाते हैं, ओनम-सादिया का आनंद लेते हैं, तरह-तरह के खेल और प्रतियोगिताएं भी होती हैं.