भारत में वायु प्रदूषण के लिए 22 से 52 फीसदी तक घरेलू प्रदूषण जिम्मेदार : यूएनईपी

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरणीय कार्यक्रम (यूएनईपी) के अध्ययन के अनुसार, भारत के वायु प्रदूषण में 22 से 52 फीसदी हिस्सा घरेलू प्रदूषण का है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए घर में खाना पकाने और गर्मी लाने से जो प्रदूषण होता है, उसे कम करने की जरूरत है।

यूएनईपी ने प्रदूषण का एक अन्य स्रोत धूल को बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि धूल कच्ची सड़कों और निर्माणाधीन ढांचों से पैदा होती है और परिवहन एवं निर्माण वाले क्षेत्रों में यह वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या पैदा करती है।

वहीं देश की राजधानी में वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बीच ‘एयर पॉल्यूशन इन एशिया एंड पैसिफिक : साइंस-बेस्ड सॉल्यूशन’ नाम की इस रिपोर्ट में वायु प्रदूषण से लड़ाई के लिए यूएनईपी ने 25 उपायों की एक सूची जारी की है।

यूएनईपी के सुझाव

– शहरों में साफ ईंधन, बिजली, प्राकृतिक गैस, एलपीजी का इस्तेमाल

– गांवों में एलपीजी, खाना पकाने के लिए उन्नत बायोमास और हीटिंग स्टोव का इस्तेमाल

– इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना

– निजी वाहनों की बजाय सार्वजनिक वाहनों के इस्तेमाल के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना