4 बिल्डरों के ऑफिस में सीबीआई छापा, दिनभर नजरबंद रहा स्टाफ

सीबीआई ने शहर के अलग-अलग इलाकों में 4 बिल्डरों के कार्यालय में छापेमारी की। देर शाम तक कार्रवाई चलती रही और पूरा स्टाफ नजरबंद रहा। किसी को भी बाहर जाने और अंदर आने की इजाजत नहीं मिली। सीबीआई ने सेक्टर 58 से 63 और 65 से 67 में रेजिडेंशल और कमर्शल कॉलोनियों से जुड़ा रेकॉर्ड जब्त किया। हर टीम में 7-8 सदस्य थे। बिल्डर कार्यालय के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों के मोबाइल भी बंद करवा दिए गए।

छापेमारी में लाइसेंस और जमींदारों के कोलेबोरेशन से जुड़े रेकॉर्ड जब्त किए। सूत्रों के अनुसार करीब 2 महीने पहले इन्हें नोटिस देकर सीबीआई ने तलब भी किया था। सुबह करीब 11 बजे एमआर एमजीएफ, डीएलएफ, एम3एम और आईरियो बिल्डर के ऑफिस पर सीबीआई की टीमें पहुंचीं।

सीबीआई ने सेक्टर 58 से 63 और 65 से 67 के जमीन अधिग्रहण घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट के तत्कालीन डायरेक्टर जनरल सीनियर आईएएस टीसी गुप्ता के अलावा 15 रियल एस्टेट कंपनियों के प्रबंध निदेशकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इन कंपनियों में आरएस इंफ्रास्ट्रक्चर, मारटीयल बिल्डकॉन, मारकोनी इंफ्राटेक, कमांडर रिलेटर्स, एसयू एस्टेट, बज होटल्स, कृश बिल्डटेक, एमआर एमजीएफ, जेएमडी लिमिटेड, अंसल प्रॉपर्टी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, गुप्ता प्रमोटर प्राइवेट लिमिटेड, डीएलएफ न्यू गुड़गांव होम्स डिवेलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, एचएस रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड, डीएसएस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और साना रिलेटर्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

जमीन अधिग्रहण में एफआईआर के बाद टीसीपी अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप है। पिछले दिनों सीबीआई ने टीसीपी के गुड़गांव ऑफिस में एक जनवरी, 2007 से 31 दिसंबर, 2013 तक कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची मांगी थी। इनमें 66 अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं।

यह है मामला

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में 2 जून, 2009 को सेक्टर 58 से 63 और 65 से 67 को विकसित करने के लिए 1417 एकड़ जमीन का अधिग्रहण हुआ था। 31 मई, 2010 को 850 एकड़ जमीन का सेक्शन 6 हुआ, सिर्फ 86 एकड़ जमीन को छोड़कर सारी जमीन को अधिग्रहणमुक्त कर दिया गया। यह जमीन नंगली उमरपुर, घाटा, तिगरा, उल्लावास, कादरपुर, मैदावास, बादशाहपुर और बहरामपुर की थी।

साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई थी कि डरा-धमकाकर कर जमींदारों की जमीन को छीना गया है। विरोध करने पर जमीन का अधिग्रहण कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 22 नवंबर, 2017 को सीबीआई जांच के आदेश जारी किए थे। 14 महीने की जांच के बाद 23 जनवरी को सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी।