J-K में 4G सेवा शुरू करने को लेकर SC में सुनवाई, जानिए किसने क्या कहा?

जम्मू-कश्मीर में 4 जी सेवा फिर से बहाल करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है. याचिकाकर्ता संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने सुनवाई के दौरान कोर्ट में कहा कि कई इलाकों में जूम के जरिए वीडियो क्लास लिए जा रहे हैं. लेकिन जम्मू-कश्मीर के बच्चों को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है. उन्होंने कहा कि खराब इंटरनेट सेवा की वजह से मेडिकल सुविधाएं भी प्रभावित हो रही हैं. यहां तक कि डॉक्टर्स को कई ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी नहीं मिल पा रही है जो उन्हें मिलनी चाहिए. 4 जी के बिना मरीज अपने डॉक्टर से भी वीडियो कॉलिंग के जरिए परामर्श नहीं ले सकते हैं. जबकि आर्टिकल 21 के तहत हरेक नागरिक को डॉक्टर पाने का अधिकार है.

बता दें, अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक नागरिक को जीवन तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संरक्षण का अधिकार मिलता है. वहीं ‘अनुच्छेद 21-क’ के तहत 6-14 साल के सभी बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार मिलता है.

हुजेफा अहमदी ने कहा कोरोना महामारी के इस संकट के बीच वहां के नागरिकों के अधिकार छीने जा रहे है. यह ना केवल अनुच्छेद 19 बल्कि 21 का भी उल्लंघन है. अनुच्छेद 19 के तहत लोगों को अभिव्यक्ति तथा भाषण, सम्मेलन, संगम, आचरण, निवास और पेशे की स्वतंत्रता मिलती है.

वहीं स्कूल संगठन की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि सभी प्राइवेट स्कूलों को वीडियो क्लासेज के जरिए शिक्षा देने की सरकारी गाइडलाइंस है. इसलिए राईट टू एजुकेशन के तहत सभी बच्चों तक शिक्षा पहुंचाना हमारा कर्तव्य है. राज्य सरकार ने जो हलफनामा दायर किया है उसमें कहा गया है कि वहां के हालात की साप्ताहिक समीक्षा हो रही है. लेकिन अब तक किसी समीक्षा की जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है.

उन्होंने कहा, ’27 तारीख के आदेश में सुरक्षा मुद्दा का हवाला दिया गया था. हम सरकार के समर्थन में खड़े हैं लेकिन डाटा से यह बात साबित होनी चाहिए कि क्या वाकई 4 जी की वजह से ऐसी कोई दिक्कत है?’

खुर्शीद ने कहा, ‘सरकारी हलफनामें में कहा गया है कि टेलिविजन के जरिए एक घंटे की क्लास दी जा रही है. लेकिन सिर्फ एक घंटे के क्लास में पूरा सिलेबस कैसे पूरा होगा? हालांकि सरकार की तरफ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी इंटरैक्टिव शिक्षण की अनुमति है लेकिन 2 जी स्पीड के साथ यह कैसे संभव है.’

बता दें, पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर जम्मू कश्मीर में 4जी इंटरनेट सेवाएं बहाल करने के लिए दायर याचिका पर केंद्र और जम्मू कश्मीर प्रशासन से 27 अप्रैल तक जवाब देने को कहा था.

अगस्त 2019 से ही घाटी में बंद है 4 जी इंटरनेट सेवा

अगस्त 2019 में मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से ही हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट और फोन सेवा पर पाबंदी लगी हुई है. तब से लेकर आज तक जम्मू-कश्मीर के लोगों को 4जी सेवा नहीं मिल पाई है. हालांकि केंद्र सरकार के निर्देश के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 2जी सेवा बहाल कर दिया था. लेकिन कई संस्था अब 4जी सेवा बहाल करने की मांग कर रहे हैं.