चार राज्यों में पार्टी ने लड़ा चुनाव, जमानत भी नहीं बचा पाए प्रत्याश

दिल्ली व पंजाब से बाहर आम आदमी पार्टी (आप) को विस्तार देने की योजना मंगलवार को एक बार फिर नाकाम होती दिखी। चार राज्यों में विधानसभा चुनाव लड़ रही आप के ज्यादातर प्रत्याशी जमानत बचाने में कामयाब नहीं हो सके। चारों प्रदेशों में आप को मिले वोट नोटा से कम रहे। हालांकि, आप के दिल्ली प्रदेश संयोजक व मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रभारी गोपाल राय का मानना है कि आप ने संगठन विस्तार के नजरिए से चुनाव लड़ा था। चुनाव के साथ यह मकसद पूरा हो गया है।

आप ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना में पूरी ताकत से चुनाव लड़ने का दावा किया था। राजस्थान में आप ने 142 सीट, मध्य प्रदेश में 208 व छत्तीसगढ़ में 85 सीटों व तेलंगाना की 41 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। पार्टी के एक राज्यसभा सांसद संजय सिंह व दिल्ली प्रदेश संयोजक गोपाल राय ने पसीना भी बहाया था। लेकिन नतीजा उम्मीद पर खरा नहीं उतरा। हालांकि, तुलनात्मक रूप से थोड़ा बेहतर छत्तीसगढ़ में रहा है। छत्तीसगढ़ में शाम छह बजे तक की मतगणना में कुल मतों का महज 0.9 फीसदी मिला। जबकि प्रदेश में नोटा पर 2.1 फीसदी वोट मिला है।

दूसरी तरफ मध्य प्रदेश में आप को 0.7 फीसदी व राजस्थान में 0.4 फीसदी वोट मिले। तेलंगाना में भी आप की हालत कमोवेश इसी तरह रही। चुनाव परिणामों पर गोपाल राय का कहना है कि पार्टी संगठन विस्तार के लिए चुनाव लड़ रही थी। चुनाव मैदान में उतरने का ही नतीजा रहा कि भाजपा के प्रति लोगों की नाराजगी सामने आई। आप का संगठन तीनों राज्यों में मजबूत हुआ है। राज्यों के चुनावी नतीजे बता रहे है कि आम लोग भाजपा को हराना चाहते हैं। इसलिए उसी पार्टी को वोट गया, जो उसे हरा सके।