सुप्रीम फैसला आने पर सील होगी अयोध्या से जुड़ी सीमा, अधिकारियों-कर्मचारियों के अवकाश निरस्त

अयोध्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले को लेकर सतर्कता बढ़ती जा रही है। फैसले के मद्देनजर जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों के अवकाश 30 नवंबर तक निरस्त कर दिए गए हैं।
शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिले में अतिरिक्त फोर्स मंगाई गई है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में अस्थाई जेल बनाने के लिए विद्यालयों को चिह्नित किया जा रहा है। फैसले के बाद अयोध्या से जुड़ी जिले की सीमाएं सील करने की भी तैयारी है। पुलिस ने एहतियात के तौर पर सतर्कता बढ़ा दी है। अयोध्या के बार्डर का जिला होने के चलते यहां खास एहतियात बरता जा रहा है।

अयोध्या विवाद के फैसले को लेकर पुलिस समेत अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों को 24 घंटे अपने-अपने क्षेत्र पर नजर रखने का निर्देश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले को लेकर शासन के निर्देश पर पुलिस-प्रशासन सतर्क हो गया है। जिले की कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है।

फैसले के बाद किसी भी स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन की अधिकारियों के साथ बैठकें लगातार जारी हैं। इनमें संबंधित अधिकारियों को सतर्क करते हुए अपने-अपने विभागीय कर्मचारियों के जरिए क्षेत्रों पर नजर रखने का निर्देश प्रशासन की ओर से दिया जा रहा है।

अयोध्या विवाद के संभावित फैसले को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आरजेबी सेल का गठन किया है। एएसपी उत्तरी आरएस गौतम को सेल का नोडल अधिकारी और सीओ सिटी को सहायक नोडल अधिकारी बनाया गया है। सेल में कई इंस्पेक्टर व दरोगाओं की भी तैनाती की गई है।

अयोध्या विवाद के फैसले के बाद किसी भी स्थिति से निपटने के लिए शासन से अर्द्धसैनिक बल की मांग की गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही जिले को अर्द्धसैनिक बल उपलब्ध हो जाएगा, जिसके बाद ये जिले में जगह जगह पर तैनात किया जाएगा।

तैयारियों के बीच स्वास्थ्य विभाग को भी सतर्क किया गया है। जिला अस्पताल समेत सभी सीएचसी पर दवाओं के साथ ही अन्य व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने को कहा गया ही। डॉक्टरों समेत पूरे स्टाफ को मुस्तैद रहने का निर्देश दिया गया है।

प्रशासन के मुुताबिक एलआईयू व अन्य जांच एजेंसियों को लगातार सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है। गोपनीय सूचनाओं से प्रशासन व पुलिस अफसरों को तत्काल अवगत कराया जा रहा है। फैसले के मद्देनजर सोशल मीडिया पर नजर रखने के लिए एक कमेटी गठित की गई है। सोशल मीडिया पर भड़काऊ व आपत्तिजनक मैसेज पोस्ट, शेयर व लाइक करने से बचने की लोगों को सलाह दी जा रही है।

जिले से अयोध्या को सीमा जुड़ी होने की वजह से शासन ने जिला प्रशासन को विशेष रूप से सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है। प्रशासन ने जिले में सुपर, जोनल व सेक्टर मजिस्ट्रेट को नामित किया है। एहतियात के तौर पर छह सुपर जोनल, पांच जोनल व 22 सेक्टर मजिस्ट्रेट को नामित करते हुए क्षेत्र का बंटवारा कर दिया है।

कई सेक्टर मजिस्ट्रेट बनाए जा रहे हैं। अधिकारियों-कर्मचारियों की छुट्टी 30 नवंबर तक निरस्त कर दी गई है। साथ ही अधिकारियों को मुख्यालय छोड़ने की दशा में पहले सूचित करने का निर्देश दिया गया है।

अयोध्या व बाराबंकी जिले की सीमा जुड़ी है। इसके चलते फैसले को लेकर जिले की सीमा सील करने की तैयारी की जा रही है। अयोध्या की सीमा से जुड़े पुलिस धानों व लेखपालों को विशेष रूप से सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा ग्राम प्रधानों को भी सूचना का स्रोत बनाया गया है। उन्हें भी किसी अप्रिय घटना की जानकारी तत्काल देने को कहा गया है।

अयोध्या विवाद के फैसले को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक में अस्थाई जेल बनाने की प्रक्रिया में पुलिस जुटी है। हर थाना क्षेत्र में एक अस्थाई जेल बनाने के लिए विद्यालयों को चिह्नित किया जा रहा है। इसके तहत सीमा पर बैरियर लगाने के साथ ही भारी पुलिस बल तैनात रहेगा। हाईवे पर आवागमन रोकने की भी तैयारी की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने सभी थाना प्रभारियों को इसके लिए आदेश जारी किये हैं।

एसपी आकाश तोमर ने बताया कि फैसले के मद्देनजर व्यवस्था तकरीबन पूरी कर ली गई है। कलेक्ट्रेट व पुलिस लाइन में दो कंट्रोल रूम स्थापित किये गये हैं। कोई भी इस पर सूचना दे सकता है। इसके साथ ही कंट्रोल रूम में आने वाली हर सूचना को गंभीरता से लेकर काम किया जा रहा है।
एसपी आकाश तोमर ने बताया कि अयोध्या विवाद के फैसले को लेकर सभी थानों की पुलिस लोगों के साथ बैठक कर रही है।

हर थाना स्तर पर एक स्थायी जेल बनेगी, इसके लिए स्कूल चिह्नित किये जा रहे हैं। जिले की सीमा सील करने की भी तैयारी है। माहौल बिगाड़ने व अफवाह फैलाने वाले अराजक तत्वों को चिह्नित कर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश सभी थानेदारों को दिए गए हैं।