बुराड़ी कांड : एक ही परिवार के 11 लोगों की मौत से उठा पर्दा, विसरा रिपोर्ट में सामने आया सच

इस साल जुलाई में दिल्‍ली के बुराड़ी में हुई एक ही परिवार के 11 लोगों की मौत से पांच महीने बाद पर्दा उठा है. इन मौतों के कारण का खुलासा अब सामने आई मृतकों की विसरा रिपोर्ट में हुआ है. इस रिपोर्ट के अनुसार सभी 11 लोगों के शरीर में कोई भी जहरीला पदार्थ होने की पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे में अब इन मौतों को सामूहिक आत्‍महत्‍या के नजरिये से देखा जा रहा है. इसमें किसी भी तरह की कोई साजिश नहीं होने की बात सामने आ रही है. विसरा रिपोर्ट आने की पुष्टि मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच की टीम की अगुआई कर रहे डीसीपी ज्वॉय टिर्की ने की है.

11 लोगों की मौत और उनकी विसरा रिपोर्ट पर डीसीपी ज्वॉय टिर्की ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद विसरा रिपोर्ट में भी यह साफ हो गया कि मौत का कारण कुछ और नहीं है. उनके मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी 11 में से कुछ लोगों के पेट खाली पाए गए थे. वहीं कुछ लोगों के पेट में हल्‍का अपचा भोजन मिला था.

दिल्‍ली पुलिस ने उस समय ऐसी आशंका जाहिर की थी कि मरने वालों के घर में कोई बाहरी व्‍यक्ति तो नहीं गया था. इस कारण पुलिस ने विसरा रिपोर्ट के अलावा साइकोलॉजिकल ऑटोप्‍सी भी कराई. पुलिस इन लोगों की मौत के कारण से पूर्णरूप से पर्दा उठाना चाहती थी.

उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी में जुलाई में हुईं ए‍क ही परिवार के 11 लोगों की मौत की जांच कर रही दिल्‍ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सभी मृतकों की साइकोलॉजिकल ऑटोप्‍सी कराई. मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी में किसी व्यक्ति के मेडिकल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया जाता है. उसके दोस्‍तों, परिवार के सदस्यों से पूछताछ करके और मौत से पहले उसकी मानसिक दशा का अध्ययन करके उस शख्स की मानसिक स्थिति पता लगाने का प्रयास किया जाता है.

इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि भाटिया परिवार के 11 लोगों ने खुदकुशी नहीं की थी, बल्कि एक धार्मिक क्रिया के दौरान दुर्घटनावश सभी मारे गए थे. दिल्ली पुलिस ने जुलाई में सीबीआई को साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी करने को कहा था. मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी के दौरान सीबीआई की केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) ने घर में मिले रजिस्टरों में लिखी बातों का तथा पुलिस द्वारा दर्ज किये गये चंडावत परिवार के सदस्यों और मित्रों के बयानों का विश्लेषण किया.

क्या कहती है पोस्टमार्टम रिपोर्ट
बुराड़ी केस में सबसे पहले दिल्ली पुलिस की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस का कहना था 10 लोगों की मौत फंदे पर झूलने से हुई है. शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं हैं. ऐसे में कहा जा सकता है कि 10 लोगों की मौत फंदे पर झूलने से हुई थी. अभी इस मामले में घर की सबसे बुजुर्ग महिला नारायणी देवी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से असंतुष्ट होने के बाद इस मामले की सीबीआई जांच हुई, जिसके बाद साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी कराने को कहा गया था.

रजिस्‍टर से मिले थे सुराग
कहा जा रहा था कि परिवार के ही एक सदस्य ललित ने सामूहिक खुदकुशी की पूरी योजना बनाई गई थी. घर की छानबानी के दौरान पुलिस को कुल 11 रजिस्टर मिले थे, जिनमें से 30 जून 2018 की आखिरी एंट्री इस घटना का राज़ खोला था. डायरी में अंतिम एंट्री में एक पन्ने पर लिखा है ‘घर का रास्ता. 9 लोग जाल में, बेबी (विधवा बहन) मंदिर के पास स्टूल पर, 10 बजे खाने का ऑर्डर, मां रोटी खिलाएगी, एक बजे क्रिया, शनिवार-रविवार रात के बीच होगी, मुंह में ठूंसा होगा गीला कपड़ा, हाथ बंधे होंगे.’ इसमें आखिरी पंक्ति है- ‘कप में पानी तैयार रखना, इसका रंग बदलेगा, मैं प्रकट होऊंगा और सबको बचाऊंगा.’ सीसीटीवी फुटेज से पता चल रहा है कि भाटिया परिवार की दो बहुएं रात में ठीक 10 बजे स्टूल ला रही हैं. 12 साल का बच्चा तार लाया. जैसा डायरी में है, मां-बाप ने बच्चों को बांधा.