केंद्र ने SC को बताया- लॉकडाउन में कर्मचारियों को पूरा वेतन देने का आदेश वापस लिया

 केंद्र सरकार ने आज सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने वह आदेश वापस ले लिया है जिसमें उद्योगों से लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों को पूरा वेतन देने के लिए कहा गया था. लेकिन याचिकाकर्ता उद्योगों ने इसे नाकाफी बताया. कुछ याचिकाकर्ताओं ने पूरा वेतन न दिए जाने के आदेश का भी विरोध किया. इसके मद्देनजर कोर्ट ने सुनवाई 1 हफ्ते के लिए टाल दी. कोर्ट ने सरकार से सभी याचिकाओं पर जवाब देने के लिए कहा है.

कर्मचारियों को पूरा वेतन दिए जाने के मसले पर दाखिल होने वाली याचिकाओं की संख्या बढ़ती जा रही है. आज सुप्रीम कोर्ट में इस मसले पर 16 याचिकाएं सुनवाई के लिए लगी थीं. कोर्ट ने पहले ही यह आदेश दिया था कि जो उद्योग कर्मचारियों को पूरा वेतन नहीं दे पा रहे हैं, उनके ऊपर फिलहाल कोई कार्रवाई न की जाए. आज भी इसे जारी रखने की बात कही.

8 और 15 मई को हुई पिछली सुनवाइयों में कोर्ट ने सरकार से इस पर स्पष्टीकरण मांगा था कि जब उद्योगों में काम बंद है, कुछ उत्पादन नहीं हो रहा, तो उन्हें पूरा वेतन देने को क्यों कहा जा रहा है? कोर्ट ने यह भी जानना चाहा था कि जिन उद्योगों में काम हो रहा है, वहां काम पर नहीं आने वाले कर्मचारियों को काम कर रहे कर्मचारियों के बराबर वेतन देना क्या उचित है? कोर्ट ने पूछा था कि क्या सरकार वेतन देने में उद्योगों की कुछ मदद करेगी?

कोर्ट के दखल के बाद 17 मई को सरकार ने नया नोटिफिकेशन जारी किया. इसमें 28 मार्च को पहले जारी किए गए नोटिफिकेशन की उस शर्त को हटा लिया, जिसमें पूरा वेतन देने के लिए कहा गया था. आज केंद्र सरकार की तरफ से कोर्ट में पेश एटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली बेंच को जानकारी दी कि नए नोटिफिकेशन के लागू होने के बाद पुरानी स्थिति बदल गई गया. इसलिए, अब इन याचिकाओं पर सुनवाई की जरूरत नहीं है.

याचिकाकर्ता उद्योगों की तरफ से नए नोटिफिकेशन को नाकाफी बताया गया. उनका कहना था कि 28 मार्च से 17 मई के बीच में अवधि को लेकर अस्पष्टता है. इसे दूर किया जाना चाहिए. इस बीच कुछ याचिकाकर्ताओं ने कर्मचारियों को पूरा वेतन न दिए जाने के नए नोटिफिकेशन का भी विरोध किया. केंद्र सरकार के तरफ से ही कोर्ट में मौजूद दूसरे वकील सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि याचिकाओं की संख्या बहुत ज्यादा है. अभी सब का जवाब तैयार नहीं किया जा सका है.

कोर्ट ने इस बात पर सहमति जताते हुए केंद्र सरकार को सभी बातों पर जवाब देने के लिए 1 हफ्ते का समय दे दिया मामले पर अगले मंगलवार को फिर सुनवाई होगी.