सरहद में शहीद हुए जवानों के परिजनों का कुछ यूं सहारा बनी भारतीय सेना

देश के लिए जीवन का सर्वोच्‍च बलिदान देने वाले जवानों के परिवारों के सशक्तिकरण के लिए रक्षा मंत्रालय ने कई महत्‍वाकांक्षी योजनाओं की शुरूआत की है. इन योजनाओं के तहत शहीदों की वीर नारियों (विधवाओं) और बच्‍चों के कौशल विकास एवं सशक्तिकरण के लिए केंद्र सरकार की फ्लैगशिप योजना और प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) प्रमुख हैं. इन्‍हीं योजनाओं के तहत रक्षा मंत्रालय ने 31 सेना कौशल प्रशिक्षण केन्द्रों (एएसटीसी) की स्थापना की गई है, जो देश के विभिन्न सैन्य स्टेशनों पर कार्य कर रहे हैं. यह जानकारी रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने राज्‍यसभा में एक प्रश्‍न के जवाब में दी है.

दरअसल, राज्‍यसभा के सांसद हर्षवर्धन सिंह डुंगरपुर ने अपने लिखित सवाल में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से पूछा था कि क्या सरकार युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की विधवाओं अथवा सीमा पर आतंकवादियों से मुठभेड़ में शहीद हुए सैनिकों की पत्नियों के कौशल-विकास हेतु कौन से विशेष कदम उठाती है. इस सवाल का जवाब देते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि 2016 से अब तक लगभग 6900 वीर नारियों को विभिन्न कौशल आधारित कार्यों के लिए कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है. उन्‍होंने बताया कि कौशल विकास पाठ्यक्रम के दौरान व्यक्तित्व विकास, सॉफ्ट स्किल डेवलपमेंट और जॉब इनरोलमेंट काउंसलिंग पर विशेष ध्यान दिया जाता है.

उन्‍होंने बताया कि वीर नारियों को दिया जाने वाला यह प्रशिक्षण पूरी तरह से निःशुल्क है. इस योजना के तहत, वीर नारियों को निःशुल्क प्रशिक्षण सामग्री और क्रेच की सुविधाएं दी जाती हैं. इसके अलावा, सेना कल्याण रोजगार संगठन जॉब प्लेसमेंट के इच्छुक अभ्यर्थियों को प्राथमिकता प्रदान करता है. देश की रक्षा में शहीद हुए जवानों की विधवाओं को लाभ के सवाल पर रक्षा मंत्री ने बताया कि शहीद के परिजनों को शहादत के दौरान 20 लाख रुपए तक मृत्‍यु उपदान, 300 दिनों का लीव-इनकैशमेंट, 60 हजार रुपए तक मृत्यु सम्बद्ध बीमा लाभ औश्र 25 से 45 लाख रुपए के बीच एकमुश्त अनुदान दिया जाता है.

उन्‍होंने बताया कि सरकार विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत युद्ध विधवाओं और उनके आश्रित बच्चों को केंद्रीय सैनिक बोर्ड सचिवालय के ज़रिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है. जिसमें ट्यूशन फीस, हॉस्‍टल प्रभार, किताब या लेखन सामग्री, यूनिफार्म और क्‍लाथिंग के लिए सहायता प्रदान करती है. उन्‍होंने बताया कि इन सब लाखों के अतिरिक्‍त सेना द्वारा 2 लाख रुपए की अनुग्रह राशि, परास्नातक और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों हेतु प्रतिवर्ष क्रमशः 25,000रुपए और 50,000 रुपए की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है. उन्‍होंने बताया कि इसके अलावा भी बहुत से ऐसे लाभ हैं, जो शहीद के परिवार और बच्‍चों को प्रदान किए जाते हैं.