ठंड में बड़े पैमाने पर आतंकी हमलों की फिराक में जैश और लश्कर: ख़ुफ़िया रिपोर्ट

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जाड़े के मौसम में भारत में बड़े पैमाने पर आतंकी हमलों को अंजाम देने की फिराक में हैं। ताजा खुफिया रिपोर्टों ये यह जानकारी सामने आई हैं। आतंकी अपने नापाक मंसूबों से केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में स्थिति सामान्य नहीं होने देना चाहते।

ख़बर के अनुसार, खुफिया एजेंसी की ओर से सरकार को उपलब्ध कराए गए इनपुट के मुताबिक जैश ने अपने आतंकियों से इसी हफ्ते बहावलपुर स्थित मुख्यालय मरकाज उस्मान-ओ-अली में हाजिरी लगाने को कहा है। आशंका है कि फिदायीन हमलों को अंजाम देने के लिए यह आदेश दिया गया है।

जैश प्रमुख मसूद अज़हर और उसका भाई मुफ्ती अब्दुल रऊफ असगर फ़िलहाल बहावलपुर में ही है। इनपुट्स से संकेत मिला है कि लश्कर के कमांडर अबू उज़ैल ने दावा किया है कि भारत जल्द ही एक घातक आत्मघाती हमला होगा।

इसके अलावा, इनपुट्स यह भी कहते हैं कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी समूह 26 अक्टूबर के बाद नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार अपने आतंकियों को भेजने को कोशिश करेंगे। सुरक्षा बलों और एजेंसियों की सक्रियता के कारण आतंकी अब तक अपने मंसूबों में नाकाम रहे हैं। लेकिन, राष्ट्रीय सुरक्षा के रणनीतिकारों का मानना है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी गुट ठंड बढ़ने पर हमले की कोशिश करेंगे।

इसी साल 5 अगस्त को, भारतीय संसद ने जम्मू-कश्मीर को मिलने वाले विशेष राज्य के दर्जे को समाप्त करते हुए अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था। एक नवंबर से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेश अस्तित्व में आ चुके हैं।

जानकारी के अनुसार, पाकिस्तानी सेना का रावलपिंडी स्थित मुख्यालय जैश को भारत में हमलों के लिए हरी झंडी दिखा चुका है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पॉंच अगस्त से आतंकरोधी अभियानों और आतंकियों एवं पाकिस्तानी सेना की बातचीत सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों द्वारा पकड़े जाने के खतरे को देखते हुए, बीते तीन महीने में सियालकोट सेक्टर में जैश की गतिविधियॉं सीमित हो गई है।

खुफिया रिपोर्ट में विशेष तौर पर सात अफगान कमांडरों के नेतृत्व 20 जैश आतंकियों की गतिविधियों का जिक्र किया गया है। घाटी में घुसपैठ के लिए इनके नियंत्रण रेखा के पास पाकिस्तानी लॉन्चिंग पैड की ओर बढ़ने की खबर है। इन्हीं आतंकियों को अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में पाकिस्तानी सेना ने बालाकोट, मानशेरा, खैबर पख्तूनख्वा के अपने कैंपों में भेजा था।