20 साल पहले हुई शहादत को वायुसेना का सलाम, तीन कारगिल योद्धाओं ने दी सरसावा में श्रद्धांजलि

वायु सेनाध्यक्ष एयरमार्शल बीएस धनोवा ने वायुसेना के सरसावा एयरबेस में MI 17 V5 हेलीकॉप्टर से उड़ान भर कर बीस साल पहले आज ही के दिन कारगिल में शहीद हुए वायुसैनिकों को श्रद्धांजलि दी. उनके साथ वायुसेना की पश्चिमी कमान के प्रमुख एयर मार्शल रघुनाथ नांबियार भी थे. शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए तीन हेलीकॉप्टर ने मिसिंग मैन फॉर्मेशन में उड़ान भरी. श्रद्धांजलि समारोह में लेह स्थित सेना की 14 वीं कोर के कमांडर ले. जनरल वाइ के जोशी भी मौजूद थे. गौरतलब है कि कारगिल की लड़ाई के दौरान एयर चीफ मार्शल धनोवा स्क्वाड्रन नंबर 17 यानि GOLDEN ARROW के कमांडिंग अफसर थे जो कि श्रीनगर से कारगिल की पहाड़ियों पर बमबारी कर रही थी.

एयर मार्शल नांबियार मिराज 2000 के पायलट थे जिन्होंने कारगिल और बटालिक की पहाड़ियों में छिपे पाकिस्तानी घुसपैठियों पर अचूक बमबारी की थी. लेफ्टिनेंट जनरल वाइ के जोशी उस समय 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स के कमांडिंग अफसर थे जिसने तोलोलिंग की पहाड़ियों में घमासान लड़ाई लड़ी थी और जिसे इस लड़ाई में दो परमवीर चक्र मिले थे. कैप्टन विक्रम बत्रा और राइफलमैन संजय कुमार दोनों इसी बटालियन के परमवीर चक्र विजेता थे.

कारगिल की पहाड़ियों में पाकिस्तानी घुसपैठियों के छिपे होने की ख़बर मिलने के बाद भारत सरकार ने 25 मई 1999 को वायुसेना के कार्रवाई की इज़ाज़त दे दी थी. इसी कार्रवाई के दौरान एक MI 17 हेलीकॉप्टर पर घुसपैठियों में अमेरिकी स्टिंगर मिसाइल से हमला किया था. इस हेलीकॉप्टर में स्क्वाड्रन लीडर आर पुंढीर, फ्लाइट लेफ्टिनेंट मुहिलन, सार्जेंट आरके साहू और सार्जेंट पीवीएनआर प्रसाद को वीरगति प्राप्त हुई थी. इस घटना से एक दिन पहले वायुसेना ने दो फ़ाइटर जेट्स भी खोए थे. इसके बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई थी और ये समझ में आ गया था कि कारगिल की पहाड़ियों में छिपे घुसपैठिये न केवल अच्छे से प्रशिक्षित हैं बल्कि बेहतर हथियारों से भी लैस हैं.

वायुसेनाध्यक्ष ने 27 मई को शहीद स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा को भटिंडा एयरबेस में मिग 21 से मिसिंग मैन फॉर्मेशन में उड़ान भर कर श्रद्धांजलि दी थी. ज़ी मीडिया के ख़ास बातचीत करते हुए एयर चीफ मार्शल धनोवा ने कहा था कि पिछले 20 साल में वायुसेना की मारक क्षमता में बहुत ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई है.’ वायुसेनाध्यक्ष ने कहा, “पहले हमारे फ़ाइटर ज़मीन पर छोटे टार्गेट पहचानने में मुश्किल का सामना करते थे लेकिन अब फ़ाइटर जेट्स ज़मीन पर छोटे से छोटे टार्गेट को पहचान कर तबाह कर सकते हैं. चिनूक भारी परिवहन हेलीकॉप्टर के ज़रिए पहाड़ों की एक घाटी से दूसरी घाटी तक बहुत कम समय में पूरी बटालियन की जगह बदली जा सकती है. वहीं अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर की मारक क्षमता का कारगिल जैसी परिस्थियों में बहुत बेहतर इस्तेमाल हो सकता है.”