फरवरी में बताएगी सरकार कौन कौन से शहर कितने हुए स्मार्ट

देश में सौ शहरों को स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत विकसित करने के लिए अब तक एक लाख करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजनाओं पर हो रहे काम की आगामी फरवरी में समीक्षा कर सरकार बताएगी कि कितने शहरों को किस हद तक स्मार्ट बनाया जा सका. आवास एवं शहरी विकास मामलों का मंत्रालय फरवरी में स्मार्ट सिटी परियोजना में चयनित सौ शहरों में चल रहे काम की दूसरे दौर की समीक्षा फरवरी में करेगा.

आवास एवं शहरी विकास सचिव दुर्गाशंकर मिश्रा ने मंगलवार को बताया कि स्मार्ट सिटी परियोजना के कार्यान्वयन के लिये गठित विशेष निकाय (एसपीवी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) की बैठक फरवरी में बुलाई है. उन्होंने बताया कि बैठक का स्थान जल्द ही तय कर लिया जाएगा. उल्लेखनीय है कि एसपीवी के सीईओ की पहली समीक्षा बैठक मई 2018 में भोपाल में हुई थी.

‘चयनित शहरों में परियोजना का आधारभूत ढांचा खड़ा हुआ’ 
मिश्रा ने अब तक एक भी स्मार्ट सिटी सतह पर नहीं दिखने के सवालों को नकारते हुये संवाददाताओं को बताया कि पिछले साढे तीन साल में सभी चयनित शहरों में परियोजना का आधारभूत ढांचा खड़ा हो गया है. उन्होंने बताया कि स्मार्ट शहरों का चयन और एसपीवी के गठन जैसे सर्वाधिक समय लेने वाले काम हो चुके हैं.

सचिव ने कहा कि शहर को स्मार्ट सड़क जैसी अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित नागरिक सेवाओं को मुहैया कराने के लिये भोपाल, सूरत और इंदौर सहित 13 शहरों में इंटीग्रेटिड कमांड एंड कंट्रोल केन्द्र कार्यरत हो चुके हैं. इसका नतीजा है कि 15 शहरों में स्मार्ट सड़क, दस शहरों में स्मार्ट सौर ऊर्जा प्रणाली, 18 शहरों में पानी की बर्बादी रोकने के लिये सेंसर आधारित स्मार्ट वॉटर सप्लाई तंत्र और चार शहरों में स्मार्ट सीवर तंत्र कार्यरत हो चुका है.

‘पूर्वोत्तर राज्यों में भी गति दिखने लगी है’ 
मिश्रा ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में भी चयनित दस स्मार्ट शहरों में काम की गति अब दिखने लगी है. इनमें अगरतला और गुवाहाटी में एसपीवी बन गया है. पूर्वोत्तर राज्यों में स्मार्ट सिटी के लिये चयनित सिक्किम के नामची शहर के काम को सर्वश्रेष्ठ बताते हुये मिश्रा ने कहा कि पूर्वोत्तर के सभी दस शहरों के एसपीवी के सीईओ को नामची का दौरा करने को कहा गया है. जिससे अन्य शहरों में भी इसके अनुरूप काम को आगे बढ़ाया जा सके.