जनभावनाएं जगाने के लिए यौन उत्पीड़न पीड़िता की पहचान के खुलासे की जरूरत नहीं :SC

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने कहा कि लोगों की राय बनाने और जनभावनाएं जगाने के लिए बलात्कार और यौन उत्पीड़न पीड़ितों की पहचान का खुलासा करने की जरूरत नहीं है क्योंकि इन मुद्दों से संवेदनशीलता के साथ निपटने की जरूरत है.

न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की सदस्यता वाली पीठ इस दलील से सहमत नहीं हुई कि कुछ मामलों में पीड़िता के नाम का खुलासा किए जाने की इजाजत होनी चाहिए क्योंकि उसका नाम और चेहरा इस तरह के अन्य यौन उत्पीड़न को रोकने में मददगार साबित हो सकता है.

न्यायालय के समक्ष यह भी दलील दी गई कि इस तरह के मामले में पीड़िता विरोध प्रदर्शन का एक प्रतीक बन जाती है. पीठ ने कहा कि न्यायालय का मानना है कि लोगों की राय बनाने और जन भावनाएं जगाने के लिए पीड़िता की पहचान का खुलासा करने की जरूरत नहीं है.

न्यायालय ने दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 के गैंगरेप और हत्या के एक चर्चित मामले का जिक्र करते हुए कहा,‘हम सभी इस बात से भली भांति अवगत हैं कि उसकी (पीड़िता की) पहचान का खुलासा किए बगैर ‘निर्भया’ देश में विरोध प्रदर्शन के लिए सर्वाधिक प्रभावी प्रतीक बन गई.