नौकरीपेशा लोगों के लिए खुशखबरी, घट सकती है ग्रैच्युटी के लिए पांच साल की सीमा

केंद्र सरकार लाखों कर्मचारियों को बड़ी खुशखबरी दे सकती है। कर्मचारियों के लिए प्रोविडेंट फंड ( PF ) और ग्रैच्युटी ( Gratuity ) की रकम काफी महत्वपूर्ण होती है। केंद्र सरकार जल्द ही ग्रैच्युटी के नियम में बदलाव कर सकती है। 18 नवंबर से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में ग्रैच्युटी के नियम को बदलने के लिए केंद्र सरकार संशोधित बिल लेकर आएगी।

सरकार कर सकती है ये बड़ा बदलाव

सूत्रों के अनुसार, सरकार ग्रैच्युटी के लिए निर्धारित समय को एक साल कर सकती है। मौजूदा समय में इस रकम के लिए किसी भी कर्मचारी का कंपनी में पांच साल तक काम करना जरूरी है। लेकिन जल्द ही सरकार इस समय अवधि को घटा सकती है। यानी अगर कोई कर्मचारी एक साल बाद भी कंपनी को छोड़ देता है, तो उसे भी ग्रैच्युटी की रकम मिलेगी। इसका सबसे ज्यादा फायदा प्राइवेट नौकरी करने वालों को होगा। 

क्या है ग्रैच्युटी ?

बता दें कि ग्रैच्युटी कंपनी के द्वारा आपकी सेवा के लिए दिया गया अतिरिक्त लाभ है, जो किसी कर्मचारी के कंपनी में पांच साल तक काम करने पर ही मिलता है। साथ ही कर्मचारी की मौत होने जैसी कुछ अन्य स्थिति में भी कंपनी द्वारा ग्रैच्युटी दी जाती है। ग्रैच्युटी के तौर पर कर्मचारियों को मोटी रकम मिलती है। कर्मचारी के वेतन और उसकी सेवा की अवधि के आधार पर यह रकम तय की जाती है।

कैसे होती है ग्रैच्युटी की गणना ?

जिस कर्मचारी को ग्रैच्युटी कानून के तहत कवर किया जाता है, उसके 15 दिनों के वेतन को कामकाज के साल से गुणा किया जाता है। इसके बाद इस रकम को 26 से भाग किया जाता है। अंतिम बेसिक सैलरी में महंगाई भत्ता भी शामिल है।

उदाहरण से समझिए

अगर आपकी बेसिक सैलरी 30,000 रुपये है और किसी कंपनी में पांच साल तक काम करते हैं, तो आपको मिलने वाली ग्रौच्युटी होगी (15X30000X5)/ 26 = 86,538 रुपये