NIT उत्तराखंड के स्थायी कैंपस की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन, 900 स्टूडेंट्स घर वापस गए

श्रीनगर में स्थित उतराखंड एनआईटी के स्थायी कैंपस के निर्माण और तत्काल अस्थायी कैंपस में शिफ्ट  करने की मांग को लेकर पिछले 19 दिनों से कक्षाओं के बहिष्कार पर डटे 900 छात्र नवरात्रि की छुट्टियों के बाद कैंपस वापस नही लौटे हैं. मंगलवार को कैंपस खुलने के बाद भी सभी क्लासरूम और हॉस्टलों पर ताले नजर आए. नवरात्रि की छुट्टियों के बाद जो छात्र-छात्राऐं घर गए थे वे वापस नही लोटे और जो हॉस्टल मे ही थे वे मंगलवार को सामान लेकर घर चले गए.

उतराखंड के इस एक मात्र एनआईटी संस्थान की स्थापना 2009 हुई थी लेकिन अब तक ये पूरा संस्थान राजकीय पॉलिटेक्निक के कैंपस की बिल्डिंगों व कुछ प्री फेब्रिकेट भवनों मे चल रहा है. कैंपस से दो बैच पास आउट हो चुके हैं लेकिन आज तक यहां ऐसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाई है जो देश के दूसरे एनआईटी कॉलेजों में हैं.

शिलान्यास के आगे नहीं बढ़ा काम 
केंद्र और राज्य सरकार स्थाई कैंपस के लिए पास के सुमाड़ी गांव मे जमीन अधिकृत कर चुकी है. हालांकि पूर्व उतराखंड सरकार ने कैंपस की चार दिवारी बनाकर इसका शिलान्यास किया था लेकिन इसके आगे आज तक कुछ काम नही हो पाया है. यही वजह है कि पिछले वर्षों में भी हॉस्टल क्लास रूम आदि शैक्षणिक सुविधाओं के लिए कैंपस में आंदोलन होते रहे हैं.

इस बार आन्दोलन ने उग्र रूप तब ले लिया जब तीन अक्टूबर को एनआईटी के अस्थाई कैंपस के बहार बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग 58 पर दो छात्राओं को एक बेकाबू कार ने टक्कर मार दी थी. इस दुर्घटना में एक छात्रा गंभीर घायल हो गई थी. जिसका अस्पताल में उपचार चल रहा है. इस घटना का आक्रोश इतना बढ़ गया कि छात्र आंदोलन पर चले गए और कैंपस को कहीं और शिफ्ट करने की मांग पर करने लगे.

क्या है स्टूडेंट्स की मांगे
​4 अक्टूबर से नवरात्रि की छुट्टियों तक छात्र-छात्राओं ने  राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, उत्तराखंड के राज्यपाल व मुख्यमंत्री, मानव संसाधन विकास मंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री उत्तराखंड, एमएचआरडी सचिव और एनआइटी के निदेशक को पत्र भेजे .

पत्र में छात्रों ने लिखा है कि वे तत्काल अस्थायी कैंपस में शिफ्टिंग चाहते हैं. जो सुविधाजनक, मेडिकल सुविधाओं, कॉरपोरेट एक्सपोजर और दूसरे सभी मानकों को पूरा करता हो. छात्रों कहना है कि आंदोलन के बाद भी राज्य व केंद्र सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की हैं.

इसके अलावा छात्रों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में वायरल किए थे. जिसमें उन्होंने तत्काल तीन मांगों- घायल छात्रा के इलाज का खर्चा उठाने, तत्काल अस्थायी कैंपस में शिफ्ट करने और स्थायी कैंपस के लिए भूमि चयन और निर्माण शुरू करवाने की मांग की थी.

वहीं इस मामले पर गढ़वाल कमिश्नर शैलेश बगौली ने कहा कि जो स्टूडेंट्स की मुख्य डिमांड है स्थाई केंपस बनाने के लिए है जिसके लिए प्रशासन के द्वारा लगातार कार्यवाई की जा रही है. तकनीकी शिक्षा विभाग भी इसको लगातार फॉलो कर रहा है. जल्द सरकार को जो जो जमीन देनी है वह दे दी जाएगी.. उम्मीद है जल्दी स्टूडेंट्स वापस लौट कर आ जाएंग.