नीति आयोग की बैठक में पीएम मोदी ने दिया मंत्र- सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास

नई सरकार के गठन के बाद आज नीति आयोग की पहली बैठक हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में कई राज्यों के मुख्यमंत्री और उप-राज्यपाल शामिल हो रहे हैं। लेकिन बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव इसमें शामिल नहीं हुए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ नीति आयोग संचालन परिषद की बैठक शुरू हुई। बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा- सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के मंत्र को पूरा करने में नीति आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका। भारत को 2024 तक 5,000 अरब डालर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण पर राज्यों के संयुक्त प्रयास से इसे हासिल किया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा और तृणमूल कांग्रेस में बढ़ी खटास की वजह से ममता शामिल नहीं हो रहीं। उन्होंने प्रधानमंत्री को सात जून को इस बारे में पत्र भी लिखा था। ममता नीति आयोग के पक्ष में नहीं हैं और उनका मानना है कि योजना आयोग इससे बेहतर कार्य करता था। केसीआर के बैठक में शामिल होने की वजह का पता नहीं चला है। वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री खराब स्वास्थ्य की वजह से इसमें शामिल नहीं होंगे।

इससे पहले सात जून को ममता ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा था। जिसमें उनका कहना था कि नीति आयोग के पास कोई वित्तीय शक्तियां नहीं हैं और राज्य की योजनाओं का समर्थन करने की शक्ति नहीं है। इस वजह से मेरे लिए बैठक में शामिल होने का कोई मतलब नहीं है। पिछले कार्यकाल में भी ममता नीति आयोग की बैठकों से दूर ही थीं। वहीं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी ने स्पष्ट कर दिया कि वह राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग करेंगे। इसी विषय पर उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी।

नीति आयोग में इन मुद्दों पर चर्चा होगी:-

1. नदियों को पुनर्जीवित करने के प्रयासों के संबंध में
2. कृषि क्षेत्र में केंद्र द्वारा नए प्रयास करने की आवश्यकता के संबंध
3. वन अधिनियम में संशोधन करने की आवश्यकता जिससे आदिवासियों को रोका जा सके और उनके जीवन में तब्दीली लाई जा सके
4. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों /आदिवासी क्षेत्रों में ऐसी नीति बनाई जाने की आवश्यकता जिससे वहां प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के बजाय वहां निवेश/ निवेश आकर्षित किए जाने के प्रयासों के संबंध में

माना जा रहा है कि कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री केंद्र सरकार और नीति आयोग के सामने अपने-अपने राज्यों की आवश्यकताओं के अनुरूप मांग उठाएंगे। इसकी रणनीति तैयार करने के लिए शुक्रवार शाम को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने दिल्ली स्थित आवास पर कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों को रात्रिभोज  पर बुलाया था।

दूसरी ओर, प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक का एजेंडा तय हो चुका है। बैठक में जल प्रबंधन, कृषि, नक्सलवाद और सुरक्षा विषय पर राज्यों से विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक में  वित्त, गृह, रक्षा, कृषि, वाणिज्य और ग्रामीण विकास मंत्री मौजूद रहेंगे। इसके अलावा नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सीईओ और सदस्य भी बैठक में शामिल होंगे।

आयोग की बैठक में पांच सूत्रीय एजेंडे पर चर्चा होगी। जिसमें महत्वाकांक्षी जिला स्तरीय कार्यक्रमों, खेती किसानी में क्रांति, सुरक्षा संबंधित मुद्दे और वामपंथी उग्रवाद की चपेट में आए जिलों पर चर्चा होगी। इसकी वजह लेफ्ट विंग के चरमपंथी समूह का देश की सुरक्षा के लिए खतरा बने रहना है।