दो रुपये में चपाती, पांच में दाल, 50 में चिकन करी…अब सांसदों को नहीं मिलेगा सस्ता खाना

भारतीय संसद ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। संसद ने निर्णय किया है कि अब सांसदों को कैंटीन में मिलने वाली सब्सिडी पर रोक लगा दी जाएगी। सांसदों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया है कि वह संसद की कैंटीन में मिलने वाली खाद्य सब्सिडी को छोड़ देंगे।
यह फैसला लोकसभा अध्यक्ष ओम कुमार बिड़ला के सुझाव के बाद लिया गया है। देशभर में लगातार मांग उठ रही थी की सांसदों को खाने में सब्सिडी नहीं मिलनी चाहिए। सब्सिडी हटाए जाने पर पक्ष और विपक्ष दोनों से मिलकर फैसला लिया है।

संसद भवन में सालाना खाने का बिल लगभग 17 करोड़ रुपये आता है। सब्सिडी हटाए जाने के बाद कैंटीन में खाने के दाम लागत के हिसाब से तय होंगे। पिछली लोकसभा में कैंटीन के खाने के दाम बढ़ाकर सब्सिडी का बिल कम किया गया था।

2015 में रिपोर्ट्स में सामने आया था कि कैंटीन में खाने की लागत पर 80 फीसदी तक सब्सिडी दी जाती है। उस समय बीजद के सांसद बिजयंत जय पांडा ने स्पीकर को चिट्ठी लिखकर सब्सिडी खत्म किए जाने की मांग की थी।

बिजयंत जय पांडा ने कहा था कि जब सरकार आर्थिक रूप से मजबूत लोगों से एलपीजी सब्सिडी वापस करने के लिए कह रही है तो सांसदों से भी कैंटीन में सब्सिडी की सुविधा वापस ले लेनी चाहिए। बता दें कि सांसदों को संसद की कैंटीन में काफी सस्ती दरों पर खाद्य पदार्थ मिलते हैं।