‘ऑपरेशन’ से आतंकियों में अफरा-तफरी, बौखलाहट में IED से कर सकते हैं विस्फोट

आतंकवादी अब कश्मीर घाटी में Improvised Explosive Device (आईईडी) को अपना नया हथियार बना रहे हैं. जम्मू-कश्मीर पुलिस का एक भगोड़ा सिपाही उन्हें आईईडी बनाने की ट्रेनिंग दे रहा है. आतंकवादी सुरक्षा बलों पर हमले के लिए गैस सिलिंडर से बने हुए आईईडी का भी इस्तेमाल करने की तैयारी में हैं. पिछले दो साल में सुरक्षा बलों की जबरदस्त कार्रवाई से आतंकवादियों में अफरा-तफरी फैली हुई है.

इस कार्रवाई में न केवल आतंकवादियों के लगभग सारे बड़े कमांडर मारे गए हैं, बल्कि उनके पास हथियारों की भी जबरदस्त कमी हो गई है. इन हालात में वह सुरक्षा बलों के साथ सीधी मुठभेड़ करने की स्थिति में नहीं हैं, इसलिए अब वह आईईडी को अपना मुख्य हथियार बना रहे हैं. कुछ ही दिन पहले दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में 44 राष्ट्रीय राइफल्स पर हमले के लिए कार में रखी आईईडी का इस्तेमाल किया गया.

इस हमले में दो सैनिक शहीद हो गए, लेकिन ड्राइवर की सतर्कता से दूसरे 10 सैनिकों की जान बच गई. खुफ़िया एजेंसियों की खबर के मुताबिक आतंकवादी डडसुर- अवंतिपुरा – पुलवामा मार्ग पर आईईडी से हमले की साजिश रच रहे हैं. इस मार्ग से भी सुरक्षा बलों की गाड़ियों का आना-जाना होता रहता है.

आतंकवादी आईईडी में रसोई गैस के सिलिंडर को इस्तेमाल करने की तैयारी में हैं. गैस सिलिंडर को अगर किसी विस्फोटक के साथ लगा दिया जाता है तो उसका असर घातक होता है.

दूसरी ख़बर जिसने सुरक्षा बलों को सतर्क किया है वह है आतंकवादियों को एक आईईडी एक्सपर्ट मिल जाना. हाल ही में आतंकवादियों के एक प्रोपेगेंडा वीडियो में कुछ आतंकवादियों को आईईडी बनाते दिखाया गया है. उसमें एक आतंकवादी जहांगीर मलिक उर्फ़ हारिस है जो पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस में सिपाही होता था. बाद में वह भगोड़ा हो गया और अब ये पक्का हो चुका है कि वह आतंकवादियों से मिल चुका है.

जहांगीर को आईईडी बनाने में माहिर माना जाता है. ख़ुफ़िया एजेंसियों के मुताबिक आतंकवादी अज़ीनापुरा, तुर्कवंगम, ज़ैनपुरा, छत्रगाम, शोपियां की सड़कों पर हमले कर सकते हैं.