तीन तलाक पर गुरुवार को लोकसभा में होगी चर्चा, बीजेपी ने अपने सांसदों को जारी किया व्हिप

नई दिल्लीः लोकसभा (Lok Sabha) में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2018 पर कल (27 दिसंबर) चर्चा की जाएगी. इसे तीन तलाक विधेयक (Triple Talaq Bill) के तौर पर भी जाना जाता है. ऐसा माना जा रहा है कि कल ही बहस के बाद तीन तलाक बिल पर वोटिंग भी हो सकती है. इसीलिए बीजेपी ने अपने सभी सांसदों को उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी की है. संसदीय कार्य मंत्री विजय गोयल ने इसकी पुष्टि की है. बता दें कि लोकसभा में बीजेपी के पास अकेले ही बहुमत से ज्यादा 271 सांसद हैं. वैसे तो ट्रिपल तलाक़ बिल लोकसभा में 28 दिसंबर 2017 को पास किया गया था, लेकिन 10 अगस्त 2018 को ये बिल राज्यसभा में बिल पारित नहीं हो सका था.

राज्यसभा ने इसे कुछ संशोधनों के साथ वापस कर दिया था. अब संशोधन के बाद क़ानून के लिए इस बिल का लोकसभा से पास होना जरूरी है. बिल में पहले जमानत का प्रावधान नहीं था, अब इसे जोड़ा गया है. अब सरकार नए सिरे से बिल लेकर आई है. 19 सितंबर 2018 को केंद्र सरकार ने ट्रिपल तलाक़ पर अध्यादेश लागू किया था.

इससे पहले 20 दिसंबर को ये विधेयक विधायी कार्य का हिस्सा था, जिसे लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे के आग्रह पर टाल दिया. सुमित्रा महाजन द्वारा रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी)सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन को विधेयक पर बोलने के लिए कहने के तुरंत बाद खड़गे खड़े हुए और चर्चा को 27 दिसंबर तक टालने के लिए आग्रह किया.

इस विधेयक को विधायी कार्य के लिए सूचीबद्ध किया गया था, जिसमें इस पर विचार व पारित किया जाना था. खड़गे ने विधेयक को बहुत ही महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, “विपक्ष विधेयक पर अच्छी चर्चा चाहता है. मैं आप से विधेयक पर चर्चा को 27 दिसंबर के लिए टालने का आग्रह करता हूं.”

सरकार तीन तलाक कानून बनाने को प्रतिबद्धः पीएम मोदी 
बता दें कि 22 दिसंबर को गांधीनगर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कट्टरपंथियों और विपक्ष की ओर से रोड़े अटकाए जाने के बावजूद सरकार मुस्लिम महिलाओं के वास्ते सामाजिक न्याय सुनिश्चित करवाने के लिए तीन तलाक के दस्तूर के खिलाफ कानून बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) महिला मोर्चा के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोदी ने यहां कहा, “सारी बाधाओं और कट्टरपंथियों व विपक्ष के प्रतिरोध के बावजूद सरकार तीन तलाक के विरुद्ध कानून बनाने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि मुस्लिम महिलाओं को अपने सामाजिक जीवन में बड़ी असुरक्षा से छुटकारा मिले.”

गौरतलब है कि सरकार ने पिछले साल मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार सुरक्षा) विधेयक लाया था, जिसे लोकसभा में उसी दिन पारित कर दिया गया, लेकिन विधेयक राज्यसभा में अटक गया जहां सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को बहुमत नहीं है. विपक्ष ने तीन तलाक को आपराधिक कृत्य बनाने पर गंभीर चिंता जाहिर की.

प्रस्तावित कानून में पत्नी को तीन तलाक देने वाले पुरुष को तीन साल तक की सजा सुनाई जा सकती है. इस्लाम के हनाफी पंथ के कानून में तीन तलाक को वैध माना गया है. इसके बाद सरकार ने इस साल सितंबर में इस मसले पर अध्यादेश लाया, जिसे संसद के मौजूदा सत्र में कानून का जामा पहनाना है, अन्यथा अध्यादेश की अवधि समाप्त हो जाएगी. मोदी ने कहा कि सरकार ने पहले की महिला हज यात्रा पर जाने के लिए महरम की शर्त हटा दी है.

इससे पहले, भारत की मुस्लिम महिला अकेले हज पर नहीं जा सकती थी. उसके साथ पति या रक्त संबंध के किसी अभिभावक का जाना अनिवार्य था. सरकार ने पिछले साल इस शर्त को हटा दिया और करीब 1,300 महिलाओं ने महरम के बगैर हज की यात्रा की. मोदी ने इस मौके पर कई परियोजनाओं की फेहरिस्त दी,जोकि उनकी सरकार ने महिलाओं के कल्याण के लए लाई है, मसलन उज्ज्वला और सुरक्षित मातृत्व. उन्होंने कहा, “महिलाएं कई प्रमुख कार्यक्रमों के केंद्र में हैं और पहली बार सुरक्षा मामले की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) में दो महिलाओं को शामिल किया गया है.”

मोदी ने सम्मेलन में उपस्थित भाजपा कार्यकर्ताओं को नरेंद्र मोदी एप डाउनलोड करके सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी उनके संपर्क के लोगों को भेजने को कहा. प्रधानमंत्री ने कहा, “जब मैं दुनिया के नेताओं को बताता हूं कि भारत में महिलाओं को 36 महीने की मातृत्व अवकाश लेने की अनुमति है तो मुझसे नजर नहीं मिला पाते हैं. विकसित देशों ने भी महिलाओं को ऐसी सुविधा नहीं दी है.”उन्होंने कहा कि उनकी सरकार मुद्रा योजना समेत विविध परियोजनाओं के माध्यम से महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन देने की कोशिश कर रही है. मुद्रा योजना के तहत महिला उद्यमियों को ज्यादा ऋण बांटे गए हैं.