भारत में समुद्र का स्तर 2.8 फीट तक बढ़ सकता है: सरकार

भारत में एक ओर जहां बाढ़ और सुनामी जैसे हालात पैदा होते हैं, वहीं दूसरी ओर कई स्थानों पर लोगों को सूखे का भी सामना करना पड़ता है। अब भारत के समुद्र स्तर को लेकर एक अध्ययन सामने आया है। जिससे तटीय क्षेत्रों का खतरा पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। देश में समुद्र के स्तर में वृद्धि पर किए एक अध्ययन से कई बड़े खतरों के बारे में पता चला है।

इसमें कहा गया है कि बाढ़ जैसी बड़ी आपदाओं के कारण लोगों का जीवन खतरे में आ जाएगा। जहां एक तरफ देश में सिंचाई आदि के लिए पानी की मांग बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर इसी साल जारी हुई यूनेस्को की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2050 तक मध्य और दक्षिण भारत भारी मात्रा में पानी का सामना करेगा। इसका मतलब ये है कि बारिश, बाढ़ और सुनामी जैसी आपदाओं के कारण देश में जल स्तर बढ़ेगा।

सरकार की ओर से कहा गया है कि पूर्वी तट पर गंगा, कृष्णा, गोदावरी, कावेरी और महानदी के डेल्टाओं को खतरा पैदा हो सकता है, साथ ही सिंचित भूमि और कई शहरी एवं अन्य बस्तियों को भी खतरा होगा जो वहां स्थित हैं। समुद्र स्तर के बढ़ने से जलवायु परिवर्तन का भारत के तटीय क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव से जुड़े एक प्रश्न के जवाब में पर्यावरण राज्य मंत्री महेश शर्मा ने लिखित जवाब में कहा, तटीय भूजल में खारे पानी की मात्रा में अनुमानित वृद्धि हुई है। झीलों के लिए खतरा बढ़ा है और बहुमूल्य भूमि पर भी बाढ़ का खतरा बढ़ा है। हालांकि उन्होंने बाद में कहा कि सरकार देश के तटीय क्षेत्रों और समुदायों की सुरक्षा के लिए सक्रिय कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने आगे कहा कि इस ओर कदम बढ़ाते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटीज- कोस्टल रेग्युलेशन जोन अधिसूचना 2011 और आइलैंड प्रोटेक्शन जोन अधिसूचना 2011 को लागू और कार्यान्वित कर रहे हैं।

इनके तहत कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटीज के पास अधिकार है कि अगर कोई इन कानूनों का उल्लंघन करे तो वह उससे पूछताछ कर सके और कानून के तहत आवश्यक कदम उठाए। तटीय क्षेत्रों पर रहने वालों का जीवन प्रभावित न हो और न ही तटीय पारिस्थितिकी को कोई नुकसान पहुंचे इसका भी ध्यान रखा जा रहा है।