SSR Death Case : रिया के भाई का ड्रग्स कनेक्शन बेनकाब, जानिए किसको कितनी हो सकती है सजा?

क्या रिया चक्रवर्ती ने सुशांत सिंह राजपूत को ड्रग्स का आदी बनाया और क्या रिया, उसके भाई शौबिक और उनके दोस्तों का ड्रग्स कनेक्शन है? ये वो बड़े सवाल हैं जिनका खुलासा सीबीआई करेगी. लेकिन सुशांत सिंह राजपूत के मामले की पड़ताल में लगी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने मुंबई और गोवा से तीन गिरफ्तारियां की हैं जिसके बाद एक पूरा ड्रग रैकेट सामने आने की आशंका है. बॉलीवुड में ड्रग्स के इस नशीले जाल में अभी कई हस्तियां फंस सकती हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि अगर रिया चक्रवर्ती के चैट्स में ड्रग्स (Drugs) का जिक्र है या उनके खुद ड्रग्स लेने की बात साबित हो जाती है तो उन्हें क्या सजा हो सकती है ?

इन सरकारी विभागों पर है बड़ी जिम्मेदारी
भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले राजस्व विभाग (Revenue Department) के तहत अवैध तरीके से ड्रग्स रखने के मामले में कार्रवाई की जा सकती है. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो 1986 से इन्हीं धाराओं के तहत काम कर रहा है. हालांकि इस एक्ट में अब तक चार बार बदलाव किए जा चुके हैं.

नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस (NDPS Act ) के तहत अलग-अलग सजा के प्रावधान हैं. इसमें धारा 15 के तहत एक साल, धारा 24 के तहत 10 की सजा व एक लाख से दो लाख रुपए तक का जुर्माना और धारा 31ए के तहत मृत्युदंड तक का प्रावधान है. NCB सुशांत सिंह राजपूत के मामले में जो जांच कर रही है वो नारकोटिक्स ड्रग ( Narcotics drug) और (Psychotropic substance) के तहत ही कर रही है.

मात्रा और अपराध के हिसाब से तय होती है सजा और जुर्माना
सजा और जुर्माना ड्रग्स की मात्रा और अपराध के हिसाब से बदलता रहता है. जैसे छोटी यानी कम मात्रा के मामले में एक साल, कमर्शियल मात्रा के मामले में 20 साल और छोटी और कमर्शियल के बीच की मात्रा में 10 साल के हिसाब से सजा दी जाती है.

इन मामलों में दोषी पाए जाने पर मौत की सजा का प्रावधान
अगर ड्रग्स का इस्तेमाल किसी आपराधिक साजिश के तहत किया जा रहा हो तो फिर दोषी साबित होने पर अदालत सजा- ए- मौत सुना सकती है. इस कैटिगिरी में किसी को मरने के लिए उकसाना या फिर किसी का फायदा उठाने के लिए उसे ड्रग्स का आदी बना देना जैसे आरोप शामिल होते हैं.

ये है कम मात्रा या कारोबारी मात्रा की कैटेगरी का पैमाना
एमडीएमए की 0.5 ग्राम यानी आधे ग्राम की मात्रा को छोटी मात्रा माना जाता है. जबकि 10 ग्राम को कारोबार करने लायक मात्रा माना जाता है. इसी तरह हेरोईन (Heroin) की 5 ग्राम की मात्रा को छोटी मात्रा की कैटेगरी में रखा जाता है. जबकि 250 ग्राम को कारोबारी मात्रा की कैटेगरी में रखा जाता है. अगर कोई व्यक्ति छोटी मात्रा के दायरे में ड्रग्स का इस्तेमाल अपने लिए कर रहा है तो उसे विक्टिम यानी पीडित मानकर सुधार गृह भेजने का भी प्रावधान है.

अभी तक चैट्स के आधार पर जांच चल रही है, लेकिन ड्रग्स की रिकवरी होने पर केस मजबूत होता है. ऐसे में ये आरोप कि रिया और शौविक सुशांत को ड्रग्स देते थे, जब तक इसे साबित करने के लिए पुख्ता सुबूत ना मिलें तब तक इस एंगल को काल्पनिक ही माना जाएगा. ड्रग्स सप्लायर से भी ड्रग्स की रिकवरी होनी जरूरी है वरना केस कमजोर हो जाता है.