Atmanirbhar Bharat: डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने से मिलेंगी नौकरियां- PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आत्मनिर्भर भारत डिफेंस इंडस्ट्री के वेबिनार को संबोधित किया. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, ‘आज यहां हो रहे इस मंथन से जो परिणाम मिलेंगे उससे रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के हमारे प्रयासों को बल और गति मिलेगी.’

पीएम ने आगे कहा कि भारत कई सालों से दुनिया के सबसे बड़े डिफेंस इंपोर्टर में से एक प्रमुख देश रहा है. जब भारत आजाद हुआ तब भारत में रक्षा उत्पादन के लिए बहुत सामर्थ्य था. भारत जैसा पोटेंशियल बहुत कम देशों के पास था. भारत का दुर्भाग्य रहा कि दशकों तक इस विषय पर ध्यान नहीं दिया गया और कोई गंभीर प्रयास नहीं किए गए. हमारे बाद शुरुआत करने वाले देश पिछले 50 सालों में हमसे बहुत आगे निकल गए लेकिन अब स्थिति बदल रही है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम चाहते हैं कि नई तकनीकों का भारत में ही विकास हो. प्राइवेट सेक्टर का इस विशेष क्षेत्र में अधिक विस्तार हो. इसके लिए लाइसेंसिंग प्रक्रिया में सुधार, लेवल प्लेइंग फील्ड की तैयारी, एक्सपोर्ट प्रक्रिया का सरलीकरण, ऑब्सेट के प्रावधानों में सुधार जैसे कई कदम उठाए गए हैं. अब एक नई मानसिकता का जन्म हुआ है. बहुत लंबे समय से CDS पर निर्णय पर नहीं हो पा रहा था लेकिन ये फैसला हुआ. डिफेंस सेक्टर में बहुत रोजगार पैदा किए जा सकते हैं.

पीएम मोदी ने आगे कहा कि मुझे इस बात की खुशी है कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस कार्य के लिए पूरी तरह से मिशन मोड पर जुटे हुए हैं. उनके इन अथक प्रयासों के कारण अच्छे परिणाम मिलना निश्चित हैं.

उन्होंने कहा कि अब पहली बार डिफेंस सेक्टर में 74 प्रतिशत तक FDI के ऑटोमैटिक रूट से आने का रास्ता खोला जा रहा है. ये नए भारत के आत्मविश्वास का परिणाम है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि 101 डिफेंस आइटम को घरेलू खरीद के लिए सीमित कर दिया गया है. इसको और आगे बढ़ाया जाएगा. सरकार की भावना आपके सामने अब बिलकुल स्‍पष्‍ट है. हमारे प्रयासों को सेना के तीनों अंगों का साथ मिल रहा है. आत्मनिर्भर भारत के लिए तकनीक अपग्रडेशन जरूरी है. इसके लिए DRDO के अलावा प्राइवेट सेक्टर और एकेडिमक संस्थानों में शोध किया जा रहा है.

पीएम मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का मतलब इनवर्ड लुकिंग नहीं है. ग्लोबल इकोनॉमी को और स्थिर व शांतिप्रिय बनाना ही हमारा लक्ष्य है. यही भावना डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता की भी है. भारत में क्षमता है, इससे हमें और बल मिलेगा. हिंद महासागर में सुरक्षा प्रदाता के रूप में हमारी भूमिका और भी सुदृढ़ होगी.