J&K: कोरोना काल के छह महीने में दो गुना बढ़ गई दस्तानों की कीमत

कोरोना काल में दस्तानों (ग्लब्स) की मांग काफी बढ़ी है, लेकिन कंपनियों की मनमानी और सरकार का ठोस नियंत्रण न होने के कारण इनकी कीमतें पिछले छह माह में दो गुना तक बढ़ गई हैं। यही नहीं बाजार में दस्तानों की भारी कमी भी है। महामारी से बचाव के लिए लोगों को मजबूरन जेब ढीली करनी पड़ रही है।

फरवरी तक दस्तानाें जैसी सामग्री को ऑपरेशन सहित अन्य चिकित्सा प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। मार्च में कोरोना संक्रमण फैलने से यह लोगों के लिए भी रोजाना की जरूरत बन गई है। अधिकतर लोग बिना दस्ताने और मास्क पहने घर से नहीं निकलते। फरवरी में सामान्य सफेद डिस्पोजेबल दस्तानों का पैक होलसेल में 250 रुपये तक आ रहा था। इस पैक में 100 पीस होते हैं।

वर्तमान में यह पैक 600 से 700 रुपये तक मिल रहा है। कई पैकिंग में पीस की मात्रा भी कम कर दी गई है। होलसेल में सफेद गलब्स दोनों हाथों की जोड़ी में 10 रुपये पड़ता है, जिसे रिटेल में 15 रुपये में बेचा जा रहा है। इसी तरह नीले डिस्पोजेबल दस्तानों की कीमतें भी बढ़ी हैं। यह 650 रुपये के पैक में आ रहा है, जिसमें 100 पीस होते हैं। यह रिटेल में 18 रुपये तक दोनों हाथों की जोड़ी में बेचा जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर उत्पादन करने वाला प्रदेश नहीं है और ट्रेडिंग प्रदेश होने के कारण कारोबारियों को माल दूसरे राज्यों से खरीदना पड़ रहा है। दस्ताने दिल्ली से आ रहे हैं और वहीं पर उत्पादन कंपनियों ने इनकी कीमतों में बढ़ोतरी की है। होलसेल में कीमतें बढ़ी हैं, जिससे उन्हें भी पहले से महंगे दामों पर खरीदना और बेचना पड़ रहा है।  -रोहित शर्मा, संयोजक, जम्मू-कश्मीर कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन