जम्मू-कश्मीरः लॉकडाउन ने तोड़ी जेकेएसआरटीसी की कमर, अब सरकार से मदद की आस

देशव्यापी लॉकडाउन का सबसे बुरा असर सार्वजनिक परिवहन प्रणाली पर पड़ा है। इसमें निजी और सरकारी परिवहन सेवा का कारोबार पूरी तरह प्रभावित हुआ है। पर्यटन प्रदेश होने के कारण निजी और सरकारी सार्वजनिक परिवहन पर्यटन पर अधिक निर्भर है। लॉकडाउन के कारण निजी और सरकारी परिवहन सेवा को भी खासा नुकसान हुआ है।  
लॉकडाउन ने जम्मू-कश्मीर स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। कारपोरेशन होने के कारण इसका ज्यादातर फोकस अपने लिए स्वयं राजस्व उत्पन्न करना है। लॉकडाउन के दो महीने में कारपोरेशन की सभी व्यावसायिक गतिविधियां ठप हैं, लेकिन प्रदेश सहित बाहरी राज्यों में फंसे प्रदेश के लोगों को निशुल्क परिवहन सेवा मुहैया करा रही है।
कारपोरेशन की व्यावसायिक गतिविधियां ठप होने का असर कर्मचारियों पर भी दिख रहा है। कर्मचारियों को तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। कारपोरेशन फंड की कमी का रोना रो रहा है। ऐसे में लॉकडाउन के बाद भी कारपोरेशन को लंबे समय तक सरकार की मदद पर निर्भर रहना पड़ेगा।केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा जारी प्रदेश के बजट में जेकेएसआरटीसी के उत्थान के लिए सौ करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। जेकेएसआरटीसी इंप्लाइज यूनियन के प्रधान मूनीर अहमद ने कहा कि कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा। कारपोरेशन फंड का रोना रो रही है, अब सरकार से मदद की उम्मीद है, जिससे स्थिति में सुधार होगा।