कश्मीर में बीजेपी नेता की हत्या के खिलाफ प्रदर्शन

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कश्मीर इकाई ने दक्षिण कश्मीर में अपने नेता की हत्या के खिलाफ श्रीनगर में विरोध प्रदर्शन किया. विरोध जताने के लिए भाजपा महासचिव ने अपनी निजी सुरक्षा वापस कर दी है. भाजपा के राज्य महासचिव अशोक कोल ने कहा, ‘जब मेरे कार्यकर्ताओं के पास सुरक्षा नहीं है तो मुझे सुरक्षा रखने का कोई अधिकार नहीं है, उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे नेता और कार्यकर्ता मारे जा रहे हैं. हम भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए यह विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.’

भाजपा के राज्य महासचिव अशोक कोल ने कहा, ‘सभी राजनीतिक कार्यकर्ताओं को सुरक्षा दी जानी चाहिए ताकि कश्मीर में अच्छा राजनीतिक माहौल बन सके और राजीनतिक गतविधियां बढ़े. उन्होंने कहा कि भाजपा कश्मीर में अपनी राजीनतिक गतविधियों को राज्य में तेज़ी से बढ़ा रही है. इसके लिए उन्हें सुरक्षा प्रधान करना बेहद ज़रूरी है.

अपने कार्यकर्ता को श्रद्धाजंलि देते उन्होंने कहा कि बीजेपी नेता अटल गुल मोहम्मद मीर की हत्या ने राज्य में राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा तंत्र पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है और हम उनकी हत्या की निंदा करते हैं.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि बीजेपी नेता अटल गुल मीर को सुरक्षा प्रदान नहीं की गई, क्योंकि वह सुरक्षा के लिए तय नहीं किए गए थे. सुरक्षा उन लोगों को दी जाती है जिन्हें सरकार द्वारा कटगोराइज़्ड किया जाता है.

गुल अटल मीर की हत्या 2017 के बाद इस तरह की चौथी बीजेपी कार्यकर्ता की हत्या है. अगस्त 2018 में पुलवामा जिले के भाजपा युवा अध्यक्ष शब्बीर अहमद भट्ट की हत्या कर दी गई थी. अप्रैल 2018 में पुलवामा के शादिमर्ग इलाके के भाजपा कार्यकर्ता गुलाम नबी पाटील की हत्या कर दी गई. नवंबर 2017 में शोपियां के पार्टी के युवा अध्यक्ष गौहर भट्ट की हत्या कर दी गई.

गौरतलब है कि इस साल फरवरी में राज्यपाल शासन ने 900 से अधिक लोगों का सुरक्षा कवर वापस ले लिया था, जिससे 2,768 पुलिसकर्मी और 389 वाहन वापस पुलिस लाइन्स में खड़े हैं.
उन व्यक्तियों, जिनकी सुरक्षा को फरवरी में पुलवामा हमले जिसमें 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे, अब वापस ले ली गई थी.

इस बीच अनंतनाग जिले में एक भाजपा नेता की हत्या के मद्देनजर, जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल ने राज्य मुख्य सचिव को पिछले कुछ महीनों में राजनीतिक लोगों की हत्याओं की जांच कराने का निर्देश दिया है.