गन्ना किसानों का बकाया 20 हज़ार करोड़ के पार पहुंचा, सरकार जल्द करेगी राहत पैकेज का एलान

केंद्र सरकार जल्द ही चीनी मिलों के लिए एक राहत पैकेज का एलान कर सकती है. राहत पैकेज का उद्देश्य चीनी मिलों के साथ साथ गन्ना किसानों को भी मदद पहुंचाना है, जिससे गन्ना किसानों को उनकी बकाया राशि का भुगतान हो सके.

सोमवार को खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने अपने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ देश में चीनी उत्पादन और गन्ना किसानों के बकाया मुद्दे की समीक्षा की. सूत्रों के मुताबिक़ मंत्रालय चीनी उद्योग के लिए एक पैकेज तैयार कर रहा है, जिसे जल्द ही मंज़ूरी के लिए कैबिनेट के पास भेजा जाएगा. पैकेज का उद्देश्य चीनी मिलों की आमदनी बढ़ाना है. साथ ही गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का लक्ष्य भी है.

22 हजार करोड़ से ज़्यादा है किसानों का बकाया 

चीनी उत्पादन वर्ष 2019 – 20 के दौरान देशभर के गन्ना किसानों का चीनी मिलों पर बकाया 22 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है. चीनी उत्पादन वर्ष की गणना हर साल 1 अक्टूबर से अगले साल 30 सितंबर तक की जाती है. अगर State Advised Price ( SAP ) के लिहाज़ से देखें तो चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया 22 हजार 79 करोड़ रुपये हो गया है. जबकि केंद्र द्वारा घोषित Fair & Remunerative Price ( FRP ) के लिहाज़ से ये बक़ाया 17 हजार 683 करोड़ रुपये होता है. FRP गन्ना खरीद की वो दर है जो केंद्र सरकार घोषित करती है जबकि राज्य सरकारें उस दर में अपनी तरफ से जो अतिरिक्त दाम लगा देती हैं, उसे SAP कहा जाता है. हालांकि मंत्रालय का कहना है कि पिछले साल मई महीने तक बक़ाया 28 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया था.

कोरोना के चलते चीनी की खपत में आई कमी 

खाद्य मंत्रालय के मुताबिक़ कोरोना महामारी और उससे लड़ने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन के चलते चीनी की खपत में 10 लाख मीट्रिक टन की कमी दर्ज की गई है. कमी के चलते चीनी की मांग का सीधा असर चीनी मिलों की आमदनी पर पड़ा है. हालांकि उम्मीद की जा रही है कि लॉकडाउन खुलने के कारण 84 लाख मीट्रिक टन चीनी की बिक्री होगी. इसके अलावा 10 लाख मीट्रिक टन चीनी को निर्यात भी किया जा सकेगा. ऐसे में चीनी मिलों को 30 हजार करोड़ रुपये की कमाई होने का अनुमान है.

अनुमान के मुताबिक़ उत्पादन वर्ष 2019 – 20 में देश में चीनी का उत्पादन 270 लाख मीट्रिक टन होगा, जबकि सरकार के पास पहले से 145 लाख मीट्रिक टन का स्टॉक भी मौजूद था. 2019 – 20 के दौरान चीनी की खपत 250 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जबकि 55 लाख मीट्रिक टन निर्यात किए जाने की संभावना है.