चमगादड़ पर रिसर्च करने से डरा अमेरिका, चीन में कोरोना वायरस पर सामने आई एक नई स्टडी

चीन ने इतने हंगामे के बाद भी आज तक ये नहीं कहा कि अब वो चमगादड़ों पर रिसर्च नहीं करेगा लेकिन अमेरिका ने चमगादड़ों या दूसरे जानवरों पर रिसर्च ना करने का फैसला ले लिया है. अमेरिका में ट्रंप सरकार ने सभी वैज्ञानिकों को निर्देश जारी कर ‘कोरोना काल’ में चमगादड़ों या दूसरे जानवरों पर रिसर्च ना करने के निर्देश दिए हैं. रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिकों को ई-मेल के ज़रिये जानकारी दी गई. अमेरिकी सरकार ने सभी संबंधित वैज्ञानिकों से कहा कि इस तरह के प्रोजेक्ट से वायरस इंसान से जानवरों में पहुंच सकता है और वायरस के प्रभावों को कम करने के प्रयासों पर संकट खड़ा हो सकता है. अमेरिका में हालात और भी ख़राब हो सकते हैं.

चीन में कोरोना वायरस पर एक नई स्टडी सामने आई है, ये स्टडी पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं. अब तक हम आप यही जानते समझते थे कि कोरोना से बचने के लिए 6 फीट की दूरी ज़रूरी है, लेकिन चीन के नये रिसर्च के मुताबिक चीनी वैज्ञानिकों ने 13 फीट की दूरी को जरूरी माना है. मरीजों को होम क्वारंटाइन करने को भी गलत बताया है क्योंकि होम क्वारंटाइन से क्लस्टर संक्रमण फैलने का ख़तरा है

हुओ शेंजेन अस्पताल में 19 फरवरी, 2 मार्च के दौरान रिसर्च इस दौरान कुल 24 मरीज़ों को वार्ड में रखा गया था. वार्ड के फर्श और हवा के नमूनों की जांच की गई थी. जांच में पाया गया कि वायरस से भरे एयरोसोल को स्वस्थ व्यक्ति की ओर फेंका जाए तो उसका कंसन्ट्रेशन 13 फीट तक जाते–जाते कमजोर पड़ता है. इसे Downstream कहते हैं लेकिन 8 फीट की दूरी तक ये बहुत प्रभावी होता है इसीलिए वैज्ञानिको ने 13 फीट दूरी को ज़रूरी माना है. अभी ये साफ नहीं कि ये Ultrafine कण संक्रामक हैं? और WHO ने भी इसके जोखिम को कम करके आंका है लेकिन अगर ये सच है तो यकीन मानिए खतरा अब और भी ज्यादा बढ़ गया है, हमें और भी ज्यादा सावधानी बरतनी होगी.