फिल्म ‘Sadak 2’ के ट्रेलर को पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा Dislike

एक शहर के लोग अगर संगठित हो जाएं तो वो अपने शहर को सबसे साफ शहर बना सकते हैं और अगर किसी देश के लोग एक साथ संगठित हो जाएं तो वो असंभव को भी संभव बना सकते हैं. पिछले एक हफ्ते में देश के लोगों ने ऐसे ही दो बड़े काम किए हैं. देश की जनता ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच को लेकर मुहिम चलाई और आखिरकार ये मामला CBI को सौंप दिया गया. देश के लोगों ने दूसरा बड़ा काम ये किया कि इसी महीने रिलीज होने वाली एक हिंदी फिल्म सड़क 2 के ट्रेलर को पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा Dislike यानी नापसंद किए जाने वाले यूट्यूब वीडियोज में शामिल करा दिया. सुशांत के लिए इंसाफ की मुहिम चलाने वाले लोगों के पास ना तो कोई पीआर थी, ना ही कोई विज्ञापन देने वाली कंपनी थी और न ही इसके लिए कोई ट्रोल आर्मी रखी गई थी. ये सब देश के लोगों ने अपने आप संगठित होकर किया है. इसलिए आज हम नए भारत की इस नई शक्ति से आपका परिचय कराएंगे.

डिस्लाइक करने वालों की संख्या 20 गुना ज्यादा
करीब एक हफ्ते पहले एक हिंदी फिल्म का ट्रेलर यूट्यूब पर रिलीज हुआ था. इस फिल्म का नाम है सड़क 2. इस फिल्म के निर्दशक हैं महेश भट्ट और इसके मुख्य कलाकार हैं, संजय दत्त, पूजा भट्ट, आलिया भट्ट और अदित्य रॉय कपूर. इनमें से ज्यादातर वो लोग हैं जो इन दिनों परिवारवाद के आरोपों को लेकर जनता के गुस्से के केंद्र में हैं. इसी वजह से इस फिल्म के ट्रेलर को अब तक एक करोड़ 10 लाख से ज्यादा लोग Dislike यानी नापसंद कर चुके हैं. जब आप यूट्यूब पर कोई वीडियो देखते हैं तो आपको उसे पसंद या नापसंद करने का विकल्प मिलता है. इस ट्रेलर को अब तक सिर्फ 6 लाख 65 हजार लोगों ने लाइक किया है जबकि इसे डिस्लाइक करने वालों की संख्या इससे 20 गुना ज्यादा है. ये फिल्मों में परिवादवाद के प्रति जनता के गुस्से का प्रमाण है और जनता के मन में इस क्रोध ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद जन्म लिया. ये आत्महत्या थी, हत्या थी, इसके पीछे कोई साजिश थी, या परिवारवाद जिम्मेदार था, इसकी जांच करने की जिम्मेदारी CBI को सौंप दी गई है. लेकिन देश में ऐसा पहली बार हुआ जब किसी व्यक्ति की मौत के बाद देश की जनता उसे न्याय दिलाने के लिए इस तरह से संगठित हुई है.

स्टार्स को अब जनता आईना दिखा रही है
सुशांत के लिए न्याय की मुहिम चलाने वालों के पीछे कोई बड़ी ताकत नहीं है. इसके पीछे सिर्फ और सिर्फ देश की जनता है जो एक अभिनेता की असमय मौत से दुखी है और जो देश में परिवारवाद की सड़क पर दौड़ने वालों को अपने आक्रोश का रेड सिग्नल दिखाना चाहती है.

पिछले 70 वर्षों से जनता इन स्टार्स को भगवान मानकर उनकी खराब से खराब फिल्में अपनी मेहनत की कमाई खर्च करके देख रही थी. उन्हीं स्टार्स को अब जनता आईना दिखा रही है. 70 वर्षों तक जनता अपनी खून पसीने के कमाई से ऐसा कंटेट और ऐसी फिल्में देखीं जिन पर कोई अपना एक रूपया भी खर्च करना नहीं चाहेगा. लेकिन जैसे ही इन लोगों ने जनता का भरोसा तोड़ा वैसे ही जनता ने इनका सर्वशक्तिशाली होने का भ्रम भी तोड़ दिया.

परिवारवाद के खिलाफ ऐसा गुस्सा पहले कभी नहीं दिखा
परिवारवाद के खिलाफ ऐसा गुस्सा पहले कभी दिखाई नहीं दिया, अब भारत की जनता राजनीति से लेकर फिल्मों तक परिवारवाद का जमकर विरोध कर रही है, चुनाव में वोट डालकर परिवारवाद को बढ़ावा देने वाले नेताओं को हराना हो या फिर सोशल मीडिया पर फिल्मी दुनिया में मौजूद परिवारवाद का विरोध इन सब बातों से सिर्फ एक ही चीज साबित होती है और वो ये है कि नए भारत का भविष्य परिवारों के दम पर शक्तिशाली बने लोग नहीं बल्कि जनता तय करेगी, क्योंकि ये नया भारत है. इसलिए हम कह रहे हैं कि ये अपनी आवाज उठाने का सबसे अच्छा समय है. अब मीडिया बड़े बड़े पत्रकारों और संपादकों के हाथ से निकल चुका है, पहले अखबार और न्यूज़ चैनलों पर खबरें दबा दी जाती थीं. लेकिन अब ऐसा संभव नहीं है. पहले बड़े बड़े उद्योगपति ये तय करते थे कि अखबारों में क्या छपेगा और क्या नहीं छपेगा, विज्ञापनों से मिलने वाले पैसे के दम पर खबरों की बलि ले ली जाती थी. लेकिन अब ये भी संभव नहीं रह गया है. पहले कोई पीआर एजेंसी किसी बहुत कमजोर अभिनय क्षमता वाले एक्टर को स्टार और एक अच्छे एक्टर को बेरोजगार बना देती थीं. लेकिन अब इस प्रथा का भी विरोध शुरू हो गया है और जनता ने फैसला करने की सारी शक्ति अपने हाथ में ले ली है.

सड़क 2 के ट्रेलर को नापसंद करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. 8 दिनों में 1 करोड़ 10 लाख लोगों के द्वारा इसे डिस्लाइक किए जाने का अर्थ ये है कि इसे हर दिन 13 लाख 75 हजार लोगों ने नापसंद किया है यानी हर घंटे 57 हजार लोगों ने परिवारवाद पर चोट की यानी हर मिनट 1 हजार लोगों ने परिवारवाद के प्रति अपना गुस्सा जताया और अभी ये संख्या लगातार बढ़ रही है.

जब किसी देश में जनता बड़े पैमाने पर किसी को खारिज करती है तो उसे कैंसिल कल्चर कहा जाता है. अमेरिका में Black Lives Matter आंदोलन की जिन लोगों ने आलोचना की. उन्हें भी सोशल मीडिया पर जनता के ऐसे ही गुस्से का सामना करना पड़ा.

अपनी शक्ति और प्रभाव का दुरुपयोग करने वाले लोगों का विरोध सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में हो रहा है और इस विरोध ने जनता को सबसे प्रभावी और सबसे शक्तिशाली बना दिया है.