कंपनी के लोन नहीं चुकाने पर प्रोमोटर्स और गारंटर्स के खिलाफ भी होगी कार्रवाई

इंसॉल्वेंसी की प्रक्रिया में अब तक कंपनियों के खिलाफ ही कार्रवाई हुई है. लेकिन जल्द ही ऐसी कंपनियों के लोन की निजी गारंटी लेने वाले प्रोमोटर्स और डिफाल्टर गारंटर्स के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू होगी. इस पर इंसॉल्वेंसी बोर्ड IBBI ने ड्राफ्ट नियम जारी कर दिया है. जिसके मुताबिक किसी कंपनी के खिलाफ इंसॉल्वेंसी शुरू होने के साथ उसके लोन की गारंटी लेने वाले या कंपनी के प्रोमोटर्स की निजी संपत्तियां भी बैंकरप्सी ट्रस्टी के पास आएंगी. हालांकि पहली कोशिश की जाएगी कि रिजोल्यूशन की प्रकिया से ही हल निकल जाए.

गारंटर की दूसरी संपत्तियां भी नीलाम की जा सकेंगी
इसके लिए बैंकों को रीपेमेंट प्लान बनाकर दिया जाएगा. अगर बैंक सहमत नहीं होते हैं उसके बाद ही गारंटर के खिलाफ इंसॉल्वेंसी की प्रक्रिया शुरू होगी. और उसके तहत बैंकरप्सी ट्रस्टी की नियुक्ति होगी. बैंकरप्सी ट्रस्टी गारंटर की संपत्तियों को नीलाम कर जो रकम वसूलेगा उसे लेंडर्स यानी लोन देने वालों के बीच बांटा जाएगा. इसका मतलब ये नहीं होगा कि केवल वही संपत्तियां नीलाम होंगी जो गिरवी रखीं थीं. बल्कि गारंटर की दूसरी संपत्तियां भी नीलाम की जा सकेंगी. ऐसा मामलों में अगर बैंकों को बांटे गए लोन में घाटा उठाना पड़ा है. तो बैंक मौजूदा इंसॉल्वेंसी के मामलों में नीलाम संपत्तियों से भी अपनी भरपाई कर सकेंगे.

जरूरी सामान, फर्नीचर आदि नीलाम नहीं होगा
हालांकि बैंकरप्ट होने वाले के जीवनयापन के लिए जरूरी संपत्तियां नीलामी के बाहर होंगी. इस कैटेगरी में परिवार की जरूरत के लिए घर, बिना गिरवी रखीं गाड़ियां, घर का जरूरी सामान, फर्नीचर जैसी चीजें नीलामी में नहीं जाएंगी. साथ ही अधिकतम 5 लाख रुपये तक के पारिवारिक गहने भी इस दायरे से बाहर होंगे.

इस मामले में इंसॉल्वेंसी की प्रक्रिया उसी NCLT में चलेगी जहां पर कंपनी के खिलाफ अर्जी दायर होगी. जिन मामलों में कर्जदार की निजी संपत्तियां सरफेसाई कानून के तहत जब्त की गई हैं. या बेची गई हैं उन मामलों में भी इंसॉल्वेंसी के नए नियमों के तहत मामला दर्ज़ किया ज सकेगा. बैंकरप्सी की प्रक्रिया शुरू होने के एक साल तक ही बैंकरप्ट माना जाएगा. उसके बाद कानूनी तौर पर वो आम व्यक्ति कि तरह जीवनयापन कर सकेगा.