सेक्सटॉर्शन पर रोक के लिए बना कानून, दोषी पाए जाने पर तीन साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान

राज्य सरकार ने सेक्सटॉर्शन पर रोक के लिए कानून को मंजूरी दे दी। इसके दायरे में अधिकार के पदों पर बैठे जिम्मेदार व्यक्ति या सरकारी कर्मचारी हैं, जिनके द्वारा महिलाओं के यौन शोषण पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध का प्रावधान है। कानून के तहत दोषी पाए जाने पर कम से कम तीन साल की सजा का प्रावधान रखा गया है। सजा पांच साल तक बढ़ाई भी जा सकती है। ऐसा कानून लागू करने वाला जम्मू-कश्मीर देश में पहला राज्य बन गया है।

राज्यपाल सत्यपाल मलिक की अध्यक्षता में राज्य प्रशासनिक परिषद (एसएसी) की बैठक में यह फैसला किया गया। बैठक में भ्रष्टाचार रोकथाम (संशोधन) विधेयक 2018 और जम्मू-कश्मीर आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक 2018 को मंजूरी दी गई है। विधेयक में रणबीर दंड संहिता में संशोधन किया गया है, जिससे धारा 354 ई के तहत विशिष्ट अपराध सेक्सटोरशन को शामिल किया गया है।

इसके तहत कोई भी सरकारी मुलाजिम किसी भी लाभ के बदले महिला का सेक्सुअल फेवर चाहता है तो यह सेक्सटॉर्शन की श्रेणी में आएगा। इसमें पीड़ित की सहमति से यौन लाभ का कोई भी बचाव काम न आएगा। धारा 154, 161 में संशोधन किए जा रहे हैं और आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 53 और एविडेंस एक्ट की धारा 53 ए में भी संशोधन होगा ताकि रणबीर दंड संहिता के तहत निर्धारित समान अपराधों के तहत इसे लाया जा सके।

मानव अंग प्रत्यारोपण की राह हुई आसान

रियासत में मानव अंगदान और अंग प्रत्यारोपण की राह आसान हुई है। अब मरीजों को अंग प्रत्यारोपण के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। राज्यपाल सत्यपाल मलिक की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई राज्य प्रशासनिक परिषद की बैठक में जम्मू-कश्मीर मानव अंग प्रत्यारोपण (संशोधन) विधेयक 2018 को मंजूरी दी गई।

नए विधेयक में राज्य में अंग प्रत्यारोपण को लेकर आ रही कठिनाइयों को दूर करने के साथ केंद्रीय अधिनियम के समान राज्य अधिनियम के प्रावधानों को लाने के लिए जम्मू-कश्मीर मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम 1997 के विभिन्न प्रावधानों में संशोधन किया गया है।

इस बिल की कुछ प्रमुख विशेषताओं में मानव अंग पुनर्प्राप्ति केंद्र की स्थापना, राज्य मानव अंगों तथा स्टोरेज नेटवर्क की स्थापना, मानव अंग दाताओं का पंजीयन करना, किसी भी मानव अंग को हटाने, स्टोरेज या प्रत्यारोपण में लगे अस्पताल को उपकरणों का वितरण, टिश्यू बैंक का पंजीकरण व समय-समय पर निरीक्षण, सलाहकार समिति का गठन करना है। साथ ही कानूनी अनुमति के बिना मानव अंग व टिश्यू या दोनों को हटाने तथा टिश्यू के अवैध इस्तेमाल के लिए दंड और इसे बढ़ाने का प्रावधान भी है।

रियासत में पहली बार रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (आरईआरए) की स्थापना को मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य अचल संपत्ति का विकास और प्लाटों, अपार्टमेंट, इमारतों तथा अन्य रियल एस्टेट परियोजनाओं की बिक्री पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित करना है।

साथ ही उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है। यहां राज्यपाल सत्यपाल मलिक की अध्यक्षता में हुई राज्य प्रशासनिक परिषद (एसएसी) की बैठक में रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण की स्थापना को मंजूरी दी गई।

एसएसी द्वारा अनुमोदित जम्मू-कश्मीर रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) विधेयक-2018 से राज्य में पहली रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण, राज्य सलाहकार परिषद और रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण की स्थापना सुनिश्चित हो सकेगी ताकि इस क्षेत्र को प्रभावी ढंग से बढ़ावा दिया जाए। आरईआरए खरीदारों धोखेबाज बिल्डरों से बचाने का काम करेगा।

वीडियो कांफ्रेंसिंग से आरोपियों की उपस्थिति को मंजूरी

राज्य में आपराधिक मामलों में ट्रायल के दौरान आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए एक स्वीकार्य प्रणाली के रूप में वीडियो कांफ्रेंसिंग को मंजूरी दी गई है। इसके लिए नागरिक प्रक्रिया संहिता (संशोधन) विधेयक 2018 को एसएसी ने मंजूरी दी है। इस फैसले से तेजी से ट्रायल और रिमांड सुनिश्चित हो सकेगा। यह जेल से न्यायालय तक आरोपियों को ले जाने में सुरक्षा जरूरतों को भी कम करने में सहायक होगा।

पांच उपजिला अस्पतालों में 158 पद सृजित
राज्य प्रशासनिक परिषद ने राज्य के पांच उप जिला अस्पतालों (एसडीएच) के उन्नयन के लिए विभिन्न श्रेणियों के 158 पदों के सृजन को मंजूरी दी है। एसएसी की बैठक में उपजिला अस्पतालों के लिए सृजित हुए पदों में एसडीएच गांदरबल के लिए 27, एसडीएच बांदीपोरा के लिए 23, एसडीएच सांबा के लिए 34, एसडीएच रियासी के लिए 35 तथा एसडीएच शोपियां के लिए 39 पदों का सृजन किया गया है। जिला अस्पतालों के स्तर पर इन उप जिला अस्पतालों के उन्नयन के साथ उक्त पांचों जिलों में स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत होंगी।