सफलता: पठानकोट सैन्य अस्पताल में दुर्लभ बीमारी से पीड़ित एक दिन के नवजात का उपचार

पंजाब में पठानकोट सैन्य अस्पताल के डॉक्टरों को जन्म से ही आंतों की एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित एक दिन के शिशु का बिना बाल चिकित्सक के इलाज करना पड़ा क्योंकि लॉकडाउन के कारण डॉक्टर की व्यवस्था नहीं हो पाई।जम्मू स्थित सेना के जनसंपर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद ने शनिवार को एक बयान में कहा कि बच्चे का पिछले हफ्ते सी-सेक्शन (ऑपरेशन) से जन्म हुआ और उसे हिर्स्चस्प्रुंग रोग होने का संदेह था। हिर्स्चस्प्रुंग आंतों की एक दुर्लभ बीमारी है। इस रोग में पूरी बड़ी आंत या उसके कुछ हिस्सों में तंत्रिकीय कोशिकाएं नहीं होती। इस जन्मजात रोग के कारण मल त्याग में मुश्किल होती है।उन्होंने बताया कि बच्चे का शीघ्र इलाज किया गया लेकिन उसकी हालत गंभीर थी और उसे कोरोना वायरस के कारण लागू बंद की वजह से चांदीमंदिर में सशस्त्र बलों के नजदीकी बाल चिकित्सा सर्जरी केंद्र नहीं ले जाया जा सकता था।लेफ्टिनेंट कर्नल आनंद ने बताया कि पठानकोट सैन्य अस्पताल के सर्जिकल विशेषज्ञ मेजर आदिल अब्दुल कलाम ने शिशु के पेट को खोलने का चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन किया। शिशु को वेंटीलेटर पर रखा गया था।उन्होंने बताया कि यह सशस्त्र बल की चिकित्सा सेवा में पहली बार है कि जोनल अस्पताल में बिना किसी बाल चिकित्सक के ऐसा जटिल ऑपरेशन किया गया।बयान में कहा गया है, ‘‘आपात स्थिति में ऑपरेशन किया गया जिसमें अगर कुछ मिनटों की भी देरी होती तो कई अंगों के काम करना बंद कर देने से मौत हो सकती थी।’’डॉक्टर ने कहा, ‘‘यह सुपर स्पैश्यिलिटी सुविधाओं के बिना काफी चुनौतीपूर्ण और तनावपूर्ण काम था जिसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।’’बयान में कहा गया है कि बच्चा अब वेंटीलेटर पर नहीं है और स्वस्थ हो रहा है।