कश्मीर और चीन मुद्दे पर भारत का साथ देने का ट्रंप को मिल सकता है फायदा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की कश्मीर नीति में कभी कोई हस्तक्षेप नहीं किया और इसी के चलते उन्हें अमेरिकी-भारतीयों के वोट मिलने की आस है. ट्रंप के चुनावी अभियान की जिम्मेदारी संभालने वाली टीम को लगता है कि कश्मीर संघर्ष पर हस्तक्षेप नहीं करके और चीन के खिलाफ भारत के साथ खड़े होकर राष्ट्रपति ने सही दांव चला है.

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप विक्ट्री इंडियन-अमेरिकन फाइनेंस कमेटी के लिए सह-अध्यक्ष अल मेसन ने कहा कि कश्मीर मुद्दे पर राष्ट्रपति ट्रंप ने बिलकुल सही रुख अपनाया है. उन्होंने विश्व स्तर पर भारत का कद बढ़ाने में मदद की है और चीन के खिलाफ नई दिल्ली का साथ दिया है.

ट्रंप की टीम ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की बात जरूर दोहराई है, लेकिन उन्होंने कभी इसमें हस्तक्षेप नहीं किया. वहीं, भारतीय-अमेरिकी वकील और कैलिफोर्निया से रिपब्लिकन पार्टी की वरिष्ठ नेता हरमीत कौर ढिल्लो (Harmeet Kaur Dhillon) ने डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत के सच्चे दोस्त हैं, और दोनों देशों के रिश्तों में यह गर्मजोशी अगले चार सालों में भी जारी रहेगी.

उन्होंने आगे कहा कि डोनाल्ड ट्रंप धार्मिक स्वतंत्रता के पक्षधर हैं, जो कि प्रवासी हिंदुओं, सिखों और मुसलमानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. ट्रंप के समर्थकों का यह भी कहना है कि कोरोना (CoronaVirus) महामारी के बावजूद भारतीय-अमेरिकियों की बेरोजगारी दर में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है. यूएस ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, 2015 में 4.1% के मुकाबले बेरोजगारी दर 2019 में 2.5 प्रतिशत पर आ गई थी.

ढिल्लो ने कहा कि भारतीयों का कठिन परिश्रम रंग ला रहा है और इसके लिए हम सभी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को धन्यवाद देते हैं. गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में अमेरिका में रहने वाले भारतीयों की भूमिका अहम होगी. इसलिए ट्रंप और उनके प्रतिद्वंद्वी बिडेन दोनों ही भारतीयों को प्रभावित करने में जुट गए हैं. चीन के साथ विवाद के दौरान जिस तरह अमेरिका ने भारत का समर्थन किया है, इसका फायदा ट्रंप को मिल सकता है.