हरियाणा: लोकसभा चुनाव की जीत-हार से तय होगा कांग्रेसी दिग्गजों का भविष्य

हरियाणा कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं के लिए आगामी लोकसभा चुनाव बड़ी चुनौती साबित होने जा रहे हैं। सीएम पद की दौड़ में शामिल इन सभी नेताओं का भविष्य अपनी लोकसभा सीट की जीत-हार से तय होगा। जो नेता अपने संसदीय सीट जीत जाएंगे उनकी दावेदारी मजबूत हो जाएगी और जिनकी सीट पर कांग्रेस हार जाएगी उन नेताओं के सीएम बनने के सपने को ग्रहण लग जाएगा। प्रदेश कांग्रेस के आधा दर्जन बड़े नेताओं को अपनी दावेदारी बरकरार रखने के लिए लोकसभा चुनाव हर हाल में जीतना ही होगा। सूत्रों के अनुसार, जिस प्रकार की संभावनाएं हैं अगर कांग्रेस हाईकमान ने सभी बड़े नेताओं को लोकसभा की चुनावी जंग में उतार दिया तो हालात और भी विकट हो जाएंगे। मेयर चुनाव और जींद उपचुनाव के परिणाम ने यह बता दिया है कि प्रदेश के सियासी हालात जहां बीजेपी के पक्ष में हैं, वहीं कांग्रेस के लिए विकट परिस्थितियां बन गई हैं। ऐसे हालातों में प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के लिए यह लोकसभा चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल भी बन गया है।

सोनीपत लोकसभा सीट से लड़ेंगे पूर्व सीएम हुड्डा
बड़े कांग्रेसी नेताओं में सबसे पहला नाम पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का आता है। रोहतक के मेयर चुनाव में मुंह की खा चुके हुड्डा को अपने सांसद बेटे दीपेंद्र को चुनाव हर हाल में जिताना ही होगा। खुद भूपेंद्र हुड्डा को भी कांग्रेस हाईकमान सोनीपत लोकसभा सीट से चुनाव में उतार सकता है। ऐसे में दोहरी चुनावी जंग लड़ना हुड्डा परिवार के लिए आसान नहीं होगा। कांग्रेस के वोट बैंक में बीजेपी द्वारा लगाई गई बड़ी सेंधमारी के बीच दीपेंद्र हुड्डा को चौथी बार सांसद बनाना भूपेंद्र हुड्डा के जीवन की सबसे बड़ी चुनौती नजर आ रही है। सूत्रों के अनुसार, अगर दीपेंद्र हुड्डा रोहतक से चुनाव हार गए तो कांग्रेस की सियासत से भूपेंद्र हुड्डा का अध्याय खत्म हो जाएगा।

कुलदीप बिश्नोई के लिए आर-पार की लड़ाई
इनके बाद नाम आता है भजन लाल के बेटे पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई का। बिश्नोई के लिए यह लोकसभा चुनाव अग्निपरीक्षा साबित होने जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भजन लाल की राजनीतिक विरासत संभाल रहे कुलदीप बिश्नोई 2014 के लोकसभा चुनाव में बेहद कांटे की टक्कर में हार गए थे। इस बार वे कांग्रेस के टिकट पर अपनी हार का हिसाब चुकता करना चाहते हैं। सूत्रों के अनुसार, वे हिसार सीट पर अपनी जगह पत्नी रेणुका बिश्नोई या बेटे भव्य बिश्नोई को टिकट दिलवा सकते हैं। कुलदीप बिश्नोई के लिए आगामी चुनाव आर या पार का मसला साबित होगा। अगर वह इस चुनाव को जीत गए तो कांग्रेस की सियासत में दोबारा वजनदार नेता साबित हो जाएंगे।

किरण चौधरी बनेंगी असरदार चेहरा
हरियाणा कांग्रेस में एक बड़ा नाम पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बंसीलाल की राजनीतिक विरासत की बागडोर संभाल रही पूर्व मंत्री किरण चौधरी का है। किरण चौधरी अपनी बेटी श्रुति के लिए पिछले लंबे समय से तैयारी कर रही हैं। पिछली बार की तरह अगर श्रुति चौधरी आगामी लोकसभा चुनाव हार गईं तो उनके सियासी भविष्य पर भी सवालिया निशान लग जाएंगे। पार्टी हाईकमान श्रुति चौधरी की जगह खुद किरण चौधरी को भी चुनाव लड़ने के निर्देश जारी कर सकता है।

अशोक तंवर सीएम पद के लिए दावेदार
दूसरा नाम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर का है। तंवर के लिए ये लोकसभा चुनाव बड़ी कसौटी बनकर आ रहे हैं। पिछले 5 साल से प्रदेश कांग्रेस की कमान संभालने वाले अशोक तंवर को हर हाल में सिरसा संसदीय सीट से चुनाव जीतना होगा। अगर वे लोकसभा चुनाव जीत गए तो मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार हो जाएंगे और अगर चुनाव हार गए तो उनकी सियासत पर सवालिया निशान लगने का खतरा मंडरा जाएगा।

कुमारी शैलजा अंबाला से लड़ेंगी चुनावी जंग
दिल्ली में कांग्रेस की सियासत में प्रदेश के नामों में पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा का नाम शामिल है। शैलजा के लिए भी अंबाला लोकसभा चुनाव बड़ी चुनौती साबित होने जा रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में शैलजा चुनावी दंगल में नहीं उतरी थीं लेकिन इस बार उनके लिए ऐसा कर पाना शायद मुमकिन नहीं होगा। पार्टी हाईकमान के आदेशों पर उन्हें अंबाला संसदीय सीट पर चुनावी जंग लड़नी पड़ सकती है। गांधी परिवार में भी उनकी गिनती बेहद वफादारों में होती है।

कैप्टन अजय यादव ने गुड़गांव से ठोकी दावेदारी
रेवाड़ी विधानसभा सीट से चुनाव जीतने वाले पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव गुड़गांव लोकसभा सीट से टिकट की दावेदारी ठोक रहे हैं। कैप्टन अजय यादव खुद को मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदारों में गिनते हैं। उस दावेदारी को मजबूत करने के लिए ही वे लोकसभा चुनाव में जीत का परचम फहराना चाहते हैं।

रणदीप सुरजेवाला को मिलेगा नया चैलेंज
रणदीप सुरजेवाला को कांग्रेस हाईकमान एक बार फिर नए चैलेंज में उतार सकता है। उनको सोनीपत या कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट से चुनावी जंग में उतारा जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो रणदीप सुरजेवाला के लिए अपना सियासी वजूद बचा पाना बहुत बड़ी चुनौती होगी। अगर वह लगातार चुनाव दूसरा चुनाव हार गए तो उनके बड़े सियासी सपनों पर ग्रहण लग जाएगा।