आतंक की वजह से अलग-थलग पड़ा PAK, कश्मीर पर उसकी सुनने वाला कोई नहीं: अमेरिकी रिपोर्ट

कश्मीर पर पाकिस्तान दुनिया में अकेला पड़ गया है. कश्मीर पर पाकिस्तान के झूठ का कोई भी साथ नहीं दे रहा है. अब अमेरिका के एक थिंक टैंक ने मान लिया है कि कश्मीर पर पाकिस्तान की सुनने वाला कोई नहीं. अमेरिकी थिंक टैंक कांग्रेसिनल रिसर्च सर्विस CSR की रिपोर्ट ने पाकिस्तान को आईना दिखाया है.

CSR की रिपोर्ट में कई विशेषज्ञों ने कहा है कि इस मुद्दे पर पाकिस्तान की साख खराब है, क्योंकि वह आतंकी समूहों का साथ देता रहा है. कश्मीर पर छह महीने से कम समय में अपनी दूसरी रिपोर्ट में CRS ने कहा कि सैन्य ऐक्शन से यथा-स्थिति बदलने के लिए पाकिस्तान की क्षमता हाल के सालों में कम हुई है. इसका मतलब है कि वह कूटनीतिक रास्ते से ही जवाब देगा.

13 जनवरी की इस रिपोर्ट में CRS ने कहा कि 5 अगस्त के बाद पाकिस्तान ‘कूटनीतिक रूप से अकेला दिखा’ है. एकमात्र देश तुर्की ने उसका साथ देने की बात कही. कश्मीर पर दुनिया पाकिस्तान को गंभीरता से नहीं लेती है. आतंकवादियों की मदद करने से कश्मीर पर इस्लामाबाद की साख कम है. सैन्य एक्शन से यथास्थिति बदलने की क्षमता पाकिस्तान के पास नहीं है. पाकिस्तान के पास भारत के एक्शन का जवाब देने का विकल्प नहीं है. मानवाधिकार मामलों में पाकिस्तान और चीन की साख कम हुई है.

25 पेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने चीन की मदद से UNSC में एक सत्र बुलवाया. 5 दशक में पहली बार कश्मीर पर चर्चा के लिए 16 अगस्त को काउंसिल की बैठक हुई। बैठक बंद दरवाजों में हुई और इसका कोई आधिकारिक बयान भी नहीं जारी किया गया.

‘पाक के पास विकल्प सीमित’
इसमें कहा गया है, ‘अधिकतर विशेषज्ञ मानते हैं कि कश्मीर पर इस्लामाबाद की साख बहुत कम है, क्योंकि उसका इतिहास वहां आतंकी समूहों को चोरी-छुपे मदद पहुंचाने का है. पाकिस्तान के नेतृत्व के पास भारत की कार्रवाई का जवाब देने के लिए विकल्प बहुत कम हैं और कश्मीर में आतंकवाद को पाकिस्तान का समर्थन वैश्विक रूप से महंगा पड़ेगा.