अबुधाबी में बन रहा पहला हिंदू मंदिर, अप्रैल में रखी जाएगी आधारशिला, PM मोदी का है अहम रोल

अबुधाबी में इस साल अप्रैल में पहले हिंदू मंदिर की आधारशिला रखी जाएगी. एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है. संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी में मंदिर बनाने की योजना को 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यहां के पहले दौरे के दौरान अबुधाबी सरकार द्वारा मंजूरी दी गई थी.

गल्फ न्यूज की खबर में कहा गया कि विश्वव्यापी हिंदू धार्मिक और नागरिक संगठन, बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था द्वारा मंदिर का निर्माण किया जा रहा है. इसमें कहा गया कि मंदिर की आधारशिला रखे जाने का समारोह 20 अप्रैल को होगा जिसकी अध्यक्षता बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था के मौजूदा गुरु और अध्यक्ष महंत स्वामी महाराज द्वारा की जाएगी.

आध्यात्मिक गुरु 18 से 29 अप्रैल के बीच यूएई में रहेंगे. अबुधाबी के वली अहद (क्राउन प्रिंस) शेख मोहम्मद बिन जाएद अल नहयन ने मंदिर के निर्माण के लिये 13.5 एकड़ जमीन तोह्फे में दी है. यूएई सरकार ने इतनी ही जमीन मंदिर परिसर में पार्किंग सुविधा के निर्माण के लिये दी है.

अबू धाबी में तकरीबन 30 लाख भारतीय रहते हैं

अबुधाबी में तकरीबन 30 लाख भारतीय रहते हैं. ये वहां की आबादी का लगभग 30 प्रतिशत हिस्‍सा है. वहां की अर्थव्‍यवस्‍था को संवारने में इस आबादी का बड़ा योगदान है. साधन-संपन्‍न इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद राजधानी अबुधाबी में कोई हिंदू मंदिर अभी तक नहीं है. इसकी तुलना में दुबई में दो मंदिर और एक गुरुद्वारा हैं. इसलिए अबुधाबी के स्‍थानीय हिंदुओं को पूजा या शादी जैसे समारोहों के लिए दुबई जाना पड़ता है. इस‍के लिए तकरीबन तीन घंटे लंबी यात्रा उनको तय करनी पड़ती है. इन दिक्‍कतों को देखते हुए यूएई सरकार ने इस मंदिर के लिए जमीन देने का निर्णय किया था.

खासियत
यह मंदिर अबुधाबी से 30 मिनट की दूर पर हाईवे से सटे ‘अबू मुरेखा’ नामक जगह पर बनेगा. इस मंदिर में शिव, कृष्‍ण और अयप्‍पा भगवान की मूर्तियां होंगी. अयप्‍पा को विष्‍णु भगवान का एक अवतार माना जाता है और केरल में इनकी पूजा होती है. इस मंदिर के निर्माण की मुहिम चलाने वाले अबू धाबी के जाने-माने भारतीय कारोबारी बीआर शेट्टी हैं. वो ‘यूएई एक्‍सचेंज’ नामक कंपनी के एमडी और सीईओ हैं.

इसके साथ ही इस मंदिर परिसर में एक खूबसूसरत बगीचा और मन को मोहने वाला वॉटर फ्रंट होगा. इस मंदिर परिसर में पर्यटक केंद्र, प्रार्थना सभा के लिए स्थान, प्रदर्शनी और बच्चों के खेलने की जगह, संबंधित विषयों से जुड़े बगीचे, वॉटर फ्रंट, फूड कोर्ट, किताब और गिफ्ट की दुकानें होंगी.

भारतीय शिल्‍पकार करेंगे निर्माण
इस मंदिर का निर्माण भारतीय शिल्पकार कर रहे हैं. यह 2020 में पूरा होगा. बोचासनवासी श्री अक्षर पुरषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) के प्रवक्ता ने बताया कि पश्चिम एशिया में पत्थरों से बना यह प्रथम हिंदू मंदिर होगा. ट्रस्ट के एक सदस्य ने खलीज टाइम्स को बताया कि यह दिल्ली में बने बीएपीएस मंदिर और न्यू जर्सी में बन रहे मंदिर की प्रतिकृति होगी.

इस मंदिर की संरचना, निर्माण और प्रबंधन करने वाली बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘मंदिर में इस्तेमाल होने वाले पत्थरों पर नक्काशी का काम भारत में शिल्पकार के जरिए किया जाएगा और फिर बाद में उसे यूएई में लाकर मंदिर को तैयार किया जाएगा. यूएई और भारत सरकार के द्वारा इस मंदिर के निर्माण से लेकर इसके प्रबंधन तक का काम दिए जाने पर बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था खुद को सम्मानित और कृतज्ञ महसूस कर रही है.