भारत और दक्षिण कोरिया ने मिलाया हाथ, आतंकवाद के खात्मे के लिए मिलकर करेंगे काम

भारत और दक्षिण कोरिया ने बुधवार को आतंकवाद की चुनौती से लड़ने के लिए क्षेत्रीय तथा वैश्विक समन्वय को गहरा करने और व्यापार तथा निवेश संबंधों को बढ़ाने के लिए नये रास्ते तलाशने का संकल्प लिया. नौवीं भारत-कोरिया संयुक्त आयोग बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई. भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने किया, वहीं कोरियाई पक्ष की अगुवाई विदेश मंत्री कांग क्यूंग-व्हा ने की. स्वराज ने एक विज्ञप्ति में कोरिया के परमाणु मुद्दे पर ध्यान देने तथा उत्तर कोरिया के साथ संवाद के माध्यम से संबंधों को बढ़ावा देने में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जेई-इन के प्रयासों को भारत का सतत समर्थन व्यक्त किया.

उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रयास फलीभूत होंगे और कोरियाई प्रायद्वीप में शांति तथा स्थिरता के नये युग का सूत्रपात करेंगे. स्वराज ने कहा कि उन्होंने कांग को यह भी बताया कि भारत अपनी ‘एक्ट ईस्ट’ नीति तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर अपने दृष्टिकोण में दक्षिण कोरिया को अपरिहार्य साझेदार के रूप में देखता है.

उन्होंने कहा, ‘‘हमने इस विचार को भी साझा किया कि आतंकवाद हर स्वरूप में और हर तरह से वैश्विक विपत्ति है और हमने समन्वित क्षेत्रीय एवं वैश्विक प्रयासों के माध्यम से इससे लड़ने का संकल्प लिया.’’ भारत और दक्षिण कोरिया के बीच संबंध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2015 में हुई सोल यात्रा के दौरान विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत हो गये थे.

विदेश मंत्री ने यह भी कहा, ‘‘हमने पिछले दो साल में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में विकास को लेकर संतोष प्रकट किया. हम अपने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने की हमारे नेताओं की सोच को साकार करने के लिए अपने प्रयासों को दोगुना करने पर सहमत हुए.’’ उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने भारत की अवसंरचना के आधुनिकीकरण में कोरियाई निवेश के नये रास्ते तलाशने पर भी विचार-विमर्श किया.